22. भारतीय टैरिपफ (चतुर्थ संशोधन) विधेयक - Page 180

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फ्आस्ट्रेलिया के संविधान के निर्माण से सम्बद्ध राजनेताओं और वकीलों ने जब स्व-शासित उपनिवेशों के संबंध में वैधानिक शक्ति के विषय पर विचार किया तो उन्होंने एक ऐसे प्राधिकरण को ध्यान में रखा जो ब्रिटिश संसद जैसा हो। इस प्रकार के प्राधिकरण का सदैव स्वयं संसद या बाध्यकारी आदेशों से बाहर तक विस्तार रहता है। संसद किसी भी व्यक्ति या प्राधिकरण को, जिसे वह चुनना चाहे, इस प्रकार के आदेश जारी करने के लिए प्राधिकृत कर सकती है। फ्विधायी शक्तिय् विधायी शक्ति को निक्षिप्त या प्रत्यायोजित करने की शक्ति की ओर संकेत करती है क्योंकि यह स्वयं संसदीय संप्रभुता की धारणा में विपक्षित थी। निस्संदेह यह हमेशा समझा जाता था कि डेलिगेट या डिपोजिटरी की शक्ति संसद, जिसने उसे सृजित किया है, द्वारा वापिस ली जा सकती है, और इस अर्थ में संसद को अपनी क्षमता अक्षुण्ण रखनी पड़ी।य्

मैं कई उद्धरण प्रस्तुत कर सकता हूँः किन्तु मैं सदन को किसी परेशानी में डालना नहीं चाहता। इस प्रश्न पर निर्णय करने के लिए कि क्या संसद विधिपूर्णतया शक्तियां प्रत्यायोजित कर सकती है, यह मानदंड अपनाया जाना चाहिएः क्या संसद ने, किसी अन्य को प्रत्यायोजित किए गए प्राधिकार को वापस लेने की अपनी क्षमता को अक्षुण्ण रखा है? अतः जहां तक पहले प्रश्न का सवाल है कि क्या संसद प्रत्यायोजन कर सकती है, यह विचार किया जाना है कि वह निर्धारित कसौटी पर खरा उतरता है या नहीं, क्या इस विधेयक में ऐसा कुछ है जो संसद को उस प्राधिकार को वापस ग्रहण करने से रोकता है। यह एक मुद्दा है।

अब, इस प्रश्न पर मुझे यह कहते हुए प्रसन्नता हो रही है कि हाउस ऑफ लार्ड्स को प्रिवी कौंसिल द्वारा रिपोर्ट किया गया एक मामला है जो अपील केसेज़ खंड 10, पृष्ठ 282 पर दिया गया है। वह मामला बिल्कुल इसी प्रकार का है। वहां, राष्ट्रमण्डल देशों में से एक के विधानमंडल ने वहां के राज्यपाल, जो वास्तव में कार्यपालिका है, को कुछ नई वस्तुओं या उसी प्रकार की वस्तुओं पर जो सीमा-शुल्क विधि की अनुसूची में सम्मिलित नहीं थीं, सीमा-शुल्क लेने से संबंधित विधि पारित की।

श्री सोंधी (पंजाब)ः क्या वह निर्धारित दर थी या परिवर्तनशील थी? केवल यही प्रश्न है।

माननीय अध्यक्षः उन्हें बोलने दें।

डॉ. अम्बेडकरः नहीं, प्रश्न यह नहीं है। यहां इस विधि द्वारा हम कार्यपालिका को किसी ऐसी वस्तु पर सीमा-शुल्क लेने की शक्ति प्रदान कर रहे हैं, जो वस्तु सीमा-शुल्क अनुसूची में नहीं दी गई है। मैं इस शुल्क की राशि या उसकी परिवर्तनशीलता के विषय में बात नहीं कर रहा हूँ। स्थिति यह है। यहां यह मामला स्वरूप है उस देश के उच्चतम अभिनिर्धारित किया था कि यह विधि अधिकारातीत है क्योंकि यह प्रत्यायोजन