22. भारतीय टैरिपफ (चतुर्थ संशोधन) विधेयक - Page 182

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हम इसे अधिकारों के भीतर मानते हुए इस पर काम करते रहें, और मामला उच्चतम न्यायालय में चला जाए तथा उच्चतम न्यायालय निर्णय करे कि यह अधिकारातीत है, तो हम अपने लिए मुश्किलें पैदा करेंगे। मैं यही कहना चाहता हूँ। सक्षमता से संबंधित प्रश्नों को उठाने का यह प्रयास इस संसद को न्यायालय में बदलने का प्रयास है। यह न्यायालय नहीं है। न्याय से संबंधित मामलों पर निर्णय से संबंधित कार्य उच्चतम न्यायालय पर छोड़ा जाना ही बेहतर है तथा हमें यह समझ कर कार्य करना है कि जो कुछ भी हम कर रहे हैं वह संसद के अधिकारों में है। अतः मेरा कहना यह है कि यह किसी भी तरह व्यवस्था का मुद्दा नहीं है तथा इसको इस प्रकार नहीं माना जाना चाहिए।

तत्पश्चात् मैं अन्य प्रश्न पर आता हूँ कि क्या संसद को अपनी शक्तियां प्रत्यायोजित करनी चाहिएं।

3.00 बजे अपराह्न

यह एक ऐसा विषय है जो पूरी तरह इस सदन की क्षमता के भीतर है पूरी तरह इस संबंध में मेरी कोई शर्त नहीं है। यदि किन्हीं परिस्थितियों में संसद यह सोचे कि उसे शक्तियों का प्रत्यायोजन नहीं करना चाहिए, तो ससंद को आग्रह करना चाहिए कि वह प्रत्यायोजित नहीं करेगी, तथा इस विषय को स्वयं संसद निपटाएगी। आपातकाल जैसी कुछ परिस्थितियों, जब ससद सत्र में हो तथा जब कार्यपालिका संबंधी कार्रवाई त्वरित गति से करनी आवश्यक हो तो संसद निस्सन्देह इस पर विचार करे तथा इन परिस्थितियों में प्रत्यायोजन की अनुमति दी जा सकती है। अतः इस विधेयक पर इस दृष्टि से विचार किया जाना है। दूसरा प्रश्न है कि क्या हमें प्रत्यायोजन करना चाहिए या नहीं। मेरे मित्र श्री त्यागी ने श्री कैम्पियन का उदाहरण देते हुए कराधान पर उनके मत को प्रस्तुत किया। मुझे इस पर कतई सन्देह नहीं कि कराधान पर संसद द्वारा उठाए जाने के लिए यही सही कदम है। कर की शक्ति अत्यंत महत्वपूर्ण है। वास्तव में यही संसद की एकमात्र शक्ति है जो सरकार को नियंत्रण में रखने के लिए संसद के पास है_ और यदि संसद राजस्व एकत्र करने की शक्ति स्थायी तौर पर कार्यपालिका को दे देती है, तो कार्यपालिका संसद की परवाह नहीं करेगी। अतः यह अत्यंत वांछनीय है कि संसद यह शक्ति अपने पास रखे। ब्रिटिश संसद कार्यपालिका को अपने नियंत्रण में दो प्रकार से रखती है, यदि मैंने इसे ठीक प्रकार से समझा है। उनके कुछ महत्वपूर्ण अधिनियम हैं जो कि केवल वार्षिक ऐक्ट हैं, जिनके लिए वहां कभी भी स्थायी ऐक्ट नहीं होते। उदाहरण के लिए, इग्लैंड में आर्मी ऐक्ट एक वार्षिक ऐक्ट है। कार्यपालिका को इस ऐक्ट के नवीकरण के लिए हर साल संसद में आना पड़ता है_ और यदि वे इसे नवीकृत नहीं कराते तो सारी सेना को भंग करना पड़ता है, क्योंकि उसे शासित करने वाला कोई कानून ही नहीं होगा। एक अन्य साधन, जिसके माध्यम से संसद कार्यपालिका पर नियंत्रण रखती है, वह है वार्षिक उद्ग्रहण (लेवी) कुछ कर, जैसे आयकर, जो कि ब्रिटिश सरकार तथा हमारी स्वयं की