22. भारतीय टैरिपफ (चतुर्थ संशोधन) विधेयक - Page 183

168 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

सरकार की आय का एक अच्छा स्रोत है। अतः इस बात पर विवाद नहीं हो सकता कि संसद को कर लगाने की अपनी शक्ति कार्यपालिका को सौंपने में बहुत चौकस और अनिच्छुक होना चाहिए। श्री त्यागी इस विषय पर अपने मत प्रकट करने के लिए स्वतंत्र हैं कि प्रत्यायोजन किया जाए या कोई अन्य उपाय किया जाए। किंतु जहां तक सक्षमता का प्रश्न है, मुझे भय है, यह विषय न्यायालय से बाहर है। इस विषय को हमारे सामने लाए जाने के उपरांत, मैं भी इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूँ कि, सम्भवतः, वित्तीय औचित्य, संसद की सर्वोच्चता को बनाए रखने के मद्देनजर, यह वांछनीय है कि इन खंडों में कुछ संशोधन किए जाएं क्योंकि ये मूल विधेयक में मौजूद थे। मैं नहीं जानता कि अभी यह मेरे वश में है या नहीं, किंतु मैं संतुष्ट हूँ कि नए संशोधनों में दो बड़े उपबंध हैं। इनमे से एक है कि उन वस्तु पर जो कस्टम नियमों में विनिर्दिष्ट नहीं हैं_ सीमा-शुल्क लेने की शक्ति केवल अल्पकाल तक (बजट सत्र तक) ही हो न कि अनिश्चित समय के लिए। जब भी बजट सत्र प्रारम्भ होता है कार्यपालिका द्वारा इस विधेयक के अन्तर्गत उगाहने वाला कोई भी सीमा-शुल्क स्वतः समाप्त हो जाता है तथा उस समय इस विषय पर संसद कार्रवाही करती है, बिल्कुल उसी तरह जिस तरह संसद अन्य वित्तीय कार्य करती है। मुझे सोचना चाहिए था कि इस विधेयक में यह एक सुधार है तथा इस प्रकार के विधान का प्रस्ताव करते समय संसद में किसी भी प्रकार का विवाद नहीं होना चाहिए।

ऽपंडित ठाकुर दास भार्गवः ............इस सब के उपरातं इस मुद्दे पर निर्णय के लिए हमें अपने संविधान की ओर लौटना होगा। जहां तक हमारे संविधान का संबंध है यह सदन मंत्रियों को इस प्रकार के किसी भी प्राधिकार को प्रत्यायोजित करने के लिए सक्षम नहीं है।

डॉ. अम्बेडकरः इसमें कोई बाधा नहीं है_ हमारे पास सम्पूर्ण अधिकार हैं।

श्री संथानम्ः क्या माननीय सदस्य अनुच्छेद 286 पढ़ेंगे?

माननीय अध्यक्षः यदि माननीय सदस्य को अपने ढंग से अपने तर्क पर बोलने दिया जाए तो इसमें कम समय लगेगा। आइए पहले उन्हें सुन लें।

पंडित ठाकुर दास भार्गवः इस समय हमें किसी मत के प्रति अपना समर्थन प्रकट करने की आवश्यकता नहीं है। मैं किसी भी मत के समर्थन में नहीं हूँ। मैं इन तथ्यों को केवल आपके विचारार्थ प्रस्तुत करता हूँ ताकि आप अंतिम निर्णय लेने से पूर्व इन पर विचार करें.............।

ऽसं. वा., खंड 6, भाग II, 4 दिसम्बर, 1950, पृष्ठ 1178