170 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
इसमें किसी भी प्रकार की बाधा डालना नहीं चाहता। वास्तव में मैंने स्वयं इस विधेयक में कुछ संशोधनों के प्रारूप तैयार किए हैं,जो मेरे सम्मुख हैं, और मैंने इस विधेयक में यह संशोधन किए जाने को आवश्यक माना है। मैं यह संशोधन श्री सिधवा को देना चाहता हूँ ताकि वे स्वयं इन्हें पटल पर रखें और इस विधि निर्माण को प्रारम्भ करने का श्रेय लें।
अतः श्री सिधवा को मेरा सुझाव था कि वे विचार के लिए इस विधेयक को अगले सत्र तक स्थगित करने के लिए कहें, तथा मुझसे संशोधन प्राप्त करें, स्वयं इन संशोधनों का नोटिस दें तथा अगली बार जब यह विधेयक आए, तो इन्हें प्रस्तुत करें तथा मैं यह वायदा करता हूँ कि मैं इन संशोधनों को स्वीकार करूँगा क्योंकि मैं स्वयं इनका सुझाव दे रहा हूँ, यदि उन्हें यह प्रक्रिया स्वीकार हो।
श्री त्यागी (उत्तर प्रदेश)ः यह कोई बहुत बड़ा वायदा नहीं है।
डॉ. अम्बेडकरः जैसा कि मैंने कहा, मैं इन संशोधनों को स्वीकार करने के लिए स्वयं को वचनबद्ध कर रहा हूँ ताकि विधेयक में त्रुटियाँ न हों, जैसा कि हम निश्चित तौर पर देख रहे हैं, इसमें बहुत त्रुटियां हैं। यह श्री सिधवा को निर्णय करना है कि वे कौन-सी प्रक्रिया अपनाते हैं। मैंने सोचा मैं इस वक्तव्य से उनकी कुछ सहायता कर सकूँगा।
श्री सिधवाः मैं अपने माननीय मित्र विधि मंत्री के वक्तव्य को सुनकर खुश था। मैं जो सुझाव दे रहा था वह यह है कि मेरा विधेयक अत्यंत साधारण है, अर्थात् सोसाइटी रजिस्ट्री अधिनियम की धारा 4 में एक परिवर्धन विधि मंत्री ने ठीक ही कहा था, कि भाग ‘क’ राज्यों ने मेरे विधेयक को अपनाने के समर्थन में अपना मत दिया है, किन्तु उन्होंने कहा था कि वे स्वयं इस विधि निर्माण का कार्य करेंगे।................मैं आशा करता हूँ कि डॉ अम्बेडकर मेरे सुझाव स्वीकार करेंगे। विभिन्न सोसाइटियों द्वारा अपनाई जा रही कपटपूर्ण प्रक्रिया को देखने के लिए हम और अधिक इन्तजार नहीं करना चाहते। चूंकि अब माननीय विधि मंत्री ने विधेयक के उपबंधों को स्वीकार कर लिया है, इसमें कोई कठिनाई नहीं है। प्रश्न केवल समय का है तथा मैं आशा करता हूँ कि विधि मंत्री मेरा सुझाव स्वीकार करेंगे।
अतः मैं इसे पेश करने की अनुमति चाहता हूँµ
फ्कि सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 का और आगे संशोधन करने के इस विधेयक पर विचार किया जाए।य्
डॉ. अम्बेडकरः मुझे खेद है। शायद मेरे माननीय मित्र श्री सिधवा ने मेरी बात को गलत अर्थ में लिया है। वे संभवतः समझ रहे हैं कि उनका विधेयक स्वीकार करते