172 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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ऽलोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक
ऽविधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर)ः मैं लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 का संशोधन करने के लिए विधेयक पुरःस्थापित करने की अनुमति के लिए निवेदन करना चाहता हूँ।
फ्कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 का संशोधन करने के लिए विधेयक पुरःस्थापित करने की अनुमति दी जाए।य्
प्रस्ताव अंगीकार किया गया।
ऽऽविधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर)ः मैं पेश करने की विनती करता हूँः
फ्कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 का संशोधन करने के विधेयक पर विचार किया जाए।य्
इस विधेयक के दो उद्देश्य हैं। पहला उद्देश्य राज्यों परिषद में भाग ‘ग’ राज्यों के प्रतिनिधित्व के लिए उपबंध करना है। दूसरा उद्देश्य लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) अध्यादेश, 1950 द्वारा किए कए उपबंधों विषयक कानून बनाना है। मेरा प्रस्ताव है कि अधिनियम के प्रथम उद्देश्य, यथा भाग ‘ग’ राज्यों के प्रतिनिधित्व के लिए उपबंध करने पर पहले विचार किया जाए। माननीय सदस्यों को स्मरण होगा कि अनुच्छेद 80 के खंड (5) के अधीन इस मामले पर विचार संसद द्वारा विधि द्वारा कर अवनिर्धारित किए जाने के लिए छोड़ा गया है। संविधान में इस बात का प्रावधान नहीं किया गया है कि भाग ‘ग’ राज्यों का प्रतिनिधित्व कैसे होना चाहिए। जैसा मैंने कहा, इस मामले पर विचार करने के लिए संसद की स्वेच्छा पर निर्णय छोड़ दिया है कि संसद जैसा उचित समझेगी ऐसे कानून द्वारा इस पर विचार करेगी। संसद पर डाले गए इस उत्तरदायित्व के कारण प्रस्तुत विधेयक को लाया गया है। इस विषय-विशेष पर विचार करने पर यह स्पष्ट है कि तीन प्रश्नों पर विचार किया जाना है। प्रथम निर्वाचक मण्डल की प्रकृति यह निर्वाचक मण्डल कैसा होना चाहिए जो केन्द्र के उच्च सदन में भाग ‘ग’ राज्यों के प्रतिनिधियों का प्रतिनिधित्व करता है अथवा चुनाव करता है। दूसरा प्रश्न सीटों के वितरण से संबंधित है जो संविधान की चौथी अनुसूची द्वारा सूची भाग ‘ग’ राज्यों को सौंपा गया है। और तीसरे प्रश्न के अंतर्गत हमें प्रतिनिधित्व पद्धति पर विचार करना है, क्या वे, चुनाव द्वारा, नामांकन द्वारा अथवा किसी अन्य पद्धति द्वारा चुने जाने चाहिएं।
अब प्रथम प्रश्न अर्थात्, निर्वाचन मण्डल विषयक प्रश्न पर इस विधेयक के खंड 9 के अंतर्गत विचार किया गया है और यह वह खंड है जिस पर मैं सबसे पहले सदन
ऽसं. वा., खंड 6, भाग II, 20 नवंबर, 1950, पृष्ठ 267
ऽऽसं. वा., खंड 7, भाग II, 12 दिसंबर, 1950, पृष्ठ 1678-83