24. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 189

174 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

उपबंध खण्ड 9 में अंतर्विष्ट है जिसे मूल अधिनियम की धारा 25 के बाद नई धारा नए 25 ‘क’, 25 ‘ख’, 25 ‘ग’ तथा 25 ‘घ’ समाविष्ट किया जाना है। यह निर्वाचक मण्डल की प्रकृति है जिसे यह विधेयक उच्च सदन में भाग ‘ग’ राज्यों के प्रतिनिधियों को निर्वाचित करने के प्रयोजन से अस्तित्व में लाना चाहता है।

मैं अन्य दो प्रश्नों को लेता हूँ जैसा कि मैंने कहा था, इन पर भी विचार करना आवश्यक है। दूसरा प्रश्न नामांकन बनाम निर्वाचन है। इस विषय पर इस विधेयक के

खंड 4 के अंतर्गत विचार किया गया है। इस सबंध में, यह महसूस किया गया है कि जहां तक दो राज्योंµमणिपुर और त्रिपुरा का संबंध है, चुनाव संभव नहीं होगा, इसका सामान्य-सा कारण यह है कि यहाँ पर कोई स्थानीय प्राधिकरण नहीं है। अतः खंड 9 द्वारा प्रस्तुत किए गए सामान्य प्रस्ताव का आधार इन दोनों राज्यों के संबध में लागू नहीं होता। त्रिपुरा वास्तव में एक आदिवासी क्षेत्र है। मणिपुर बहुत ही पिछड़ा क्षेत्र है। यहाँ पर कोई स्थानीय निकाय और संगठन नहीं है। इन दोनों राज्यों का शैक्षणिक स्तर भी बहुत पिछड़ा हुआ है। फलतः यह आशा नहीं है कि यदि शैक्षणिक अर्हता लागू की गई तो इन दोनों देशों के प्रतिनिधित्व को प्रस्तुत करने में चुनावों की अनुमति देने के लिए पर्याप्त निर्वाचन-क्षेत्र प्राप्त करना संभव होगा। फलतः यह महसूस किया गया कि राष्ट्रपति द्व ारा नामांकन किए जाने पर ही इन दोनों राज्यों से प्रतिनिधित्व प्राप्त करने का रास्ता शेष बचा है और यह प्रस्ताव है कि उनका नामांकन प्रत्येक दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के बाद परिवर्तित होµएक बार मणिपुर के प्रतिनिधि को राष्ट्रपति द्वारा दो वर्ष के लिए नामित किया जाएगा और अगले दो वर्ष की अवधि के लिए त्रिपुरा के प्रतिनिधि को नामित किया जाएगा। भाग ‘ग’ के शेष राज्यों का प्रतिनिधित्व चुनाव द्वारा होगा।

जैसा कि मैंने कहा अगला प्रश्न सीटों के वितरण विषयक है। सदन को याद होगा, अथवा संदर्भ के लिए इस अनुसूची- IV में देखा जा सकता है, कि इस अनुसूची में तीनों स्थितियों में दो राज्यों के लिए एक सीट दी गई है। ये तीन मामले मणिपुर तथा त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश तथा बिलासपुर हैं जिनके लिए कुल मिलाकर एक सीट है और अजमेर और कुर्ग के लिए एक सीट है।

इन राज्यों के प्रतिनिधित्व को निर्धारित करने के लिए दो पद्धतियां हैं जिनको एक सीट संयुक्त रूप से दी गई है। एक है इन्हें एक निर्वाचन-क्षेत्र माना जाना तथा दूसरी है उन्हें दो विभिन्न निर्वाचन क्षेत्र माना जाना तथा उनको वैकल्पिक प्रतिनिधित्व प्रदान करना। मणिपुर और त्रिपुरा के मामले को पहले ही निपटाया जा चुका है, क्योंकि वहां पर चुनाव कराए जाने का प्रश्न ही नहीं उठता। यह ऐसा मामला है जिसे नामांकन द्वारा निर्धारित किया गया है। अजमेर और कुर्ग के संबंध में प्रस्ताव है कि उनका बारी-बारी से चुनाव द्वारा विशेष प्रतिनिधित्व होना चाहिए। एक बार यह सीट अजमेर में चुनाव द्वारा भरी जाए तो दूसरी बार यह सीट कुर्ग के प्रतिनिधित्व द्वारा भरी जानी चाहिए। हिमाचल