24. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 190

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प्रदेश और बिलासपुर के संबंध में प्रस्ताव है कि इन दोनों राज्यों को एक निर्वाचन-क्षेत्र माना जाए तथा वे संयुक्त चुनाव द्वारा एक प्रतिनिधि चुनें।

सदन निस्सन्देह कहेगा कि हमने अजमेर और कुर्ग को एक-जैसा माना है तथा हिमाचल प्रदेश और बिलासपुर को भिन्न तरह से माना है। यह बहस स्पष्ट तौर पर सही है। परन्तु मैं नहीं समझ पाया हूँ कि दो राज्यों की शृंखलाओं को सामान्य आधार पर एक मानना कैसे संभव है। यह महसूस किया गया कि अजमेर और कुर्ग निकटस्थ क्षेत्र नहीं हैं। यह भी महसूस किया गया कि उनका सांस्कृतिक दृष्टिकोण, उनकी जीवन-पद्धति तथा रीति-रिवाज, उनकी आर्थिक समस्या बिल्कुल भिन्न व पृथक हैं। यह कहना मुश्किल है कि अजमेर का प्रतिनिधि कुर्ग के लोगों अथवा कुर्ग का प्रतिनिधि अजमेर के लोगों की समस्याओं और कठिनाइयों को सही ढंग से प्रस्तुत कर सकता है। परन्तु जहां तक हिमाचल प्रदेश और बिलासपुर का संबंध है दोनों ही निकटस्थ क्षेत्र हैं। वास्तव में यह एक संयोग मात्र है कि जिसे मैं समझ नहीं सकता अथवा समझा नहीं सकता कि राज्य मंत्रालय ने दो राज्यों को दो सुभिन्न अनन्य कोष्ठों में रखने का निर्णय लिया। मुझे यह सोचना चाहिए था कि दोनों राज्यों को एक में विलय कर देना चाहिए। मुझे विश्वास है कि ऐसा होगा। शायद यह चुनाव होने से बहुत पहले हो सकता है। मुझे कोई औचित्य समझ में नहीं आता कि जिन परिस्थितियों का उल्लेख मैंने किया है उनके कारण अजमेर और कुर्ग के मामले में निर्वाचन-क्षेत्र के विभाजन सिद्धान्त को हिमाचल प्रदेश और बिलासपुर में आवश्यक रूप से, वार्षिक रूप से तथा सुस्पष्ट आज्ञापक की दृष्टि से लागू करना होगा।

अतः प्रस्ताव यह है कि मणिपुर और त्रिपुरा में अलग-अलग निर्वाचक मण्डल होंगे और उनका प्रतिनिधित्व बारी-बारी से दो वर्ष की अवधि के लिए राष्ट्रपति द्वारा नामांकन के माध्यम से निर्धारित किया जाएगा। जहाँ तक हिमाचल प्रदेश और बिलासपुर का संबंध है, दोनों एक निर्वाचन-क्षेत्र का गठन करेंगे तथा वे संयुक्त चुनाव द्वारा एक प्रतिनिधि चुनेंगे। अजमेर और कुर्ग के संबंध में उपबंध है कि अजमेर दो वर्ष के लिए दोनों के लिए आरक्षित सीटों का उपयोग करेगा तथा दो वर्ष के बाद कुर्ग दोनों के लिए आरक्षित सीटों का उपयोग करेगा।

हमने भाग ‘ग’ राज्यों के प्रतिनिधित्व के लिए विधेयक में उक्त उपबंध किए हैं। जैसा कि मैंने प्रारंभ में कहा था, इस विधेयक के दो उद्देश्य थे। प्रथम, उच्च सदन में भाग ‘ग’ राज्यों के प्रतिनिधित्व का उपबंध करना। द्वितीय, अध्यादेश में के उपबंधों को कानूनी प्रभाव देना।

मैं संक्षेप में सदन को यह बताना चाहूंगा कि सरकार को यह अध्यादेश जारी करना क्यों आवश्यक हो गया था। जैसा कि सदन को याद होगा, एक बार सरकार ने महसूस किया था कि ये चुनाव अप्रैल और मई के महीनों में हो सकते थे और वह उस उद्देश्य