24. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 193

178 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

ऽऽश्री कामथः जहाँ तक प्रस्तुत विधेयक तथा राज्य परिषद में मणिपुर और त्रिपुरा के सदस्य का संबंध है, यह विधेयक इस बिन्दु पर मौन है कि क्या राष्ट्रपति उस सदस्य को नामित करेंगे जिसे इन विषयों में अनुभव है अथवा इन विषयों में विशेष जानकारी प्राप्त की है। मैं चाहूँगा कि डॉ. अम्बेडकर इस पर कुछ प्रकाश डालें, परन्तु मेरा विचार है कि नामित किया गया सदस्य उन 12 सदस्यों के अतिरिक्त होगा जिनका उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 80 के खंड (1) (क) में किया गया है।

डॉ अम्बेडकरः यह 238 से अलग होगा।

श्री कामथः मुझे खुशी है कि डॉ. अम्बेडकर ने हमें इस अनुच्छेद का सही अर्थ बताया है। अतः यह 13 हैं। त्यागी ने मुझे बताया है कि यह अशुभ संख्या है_ मैं नहीं समझता कि क्या यह वास्तव में अशुभ है।

ऽऽऽमाननीय अध्यक्षः मैं भाग ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ राज्यों के सभी सदस्यों का उल्लेख कर रहा था, क्योंकि सभी उचित प्रजातांत्रिक तंत्र में रुचि रखते हैं। मैंने विशेष रूप से भाग ‘ग’ के उन राज्यों का उल्लेख किया क्योंकि यह ज्यादातर वे हैं जो इस विधेयक से प्रभावित हैं। इसीलिए मैंने सुझाव दिया कि उन्हें पूर्ण अवसर दिए जाएं। यही मुद्दा था परन्तु सबको मिलना चाहिए। इस प्रकार, यदि यह स्वीकार्य है, मैं समझता हूं कि मुझे इस विषय को समाप्त कर देना चाहिए और कार्यसूची की अगली मद पर विचार करना चाहिए। क्या यह स्वीकार्य है?

विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर)ः मैं इस सुझाव को स्वीकार करने के लिए तैयार हूँ।

श्री जे.आर कपूरः क्या मैं जो कहना चाहता था उसे पूरा कर सकता हूँ?

माननीय अध्यक्षः आर्डर, आर्डर, उन्हें अब अनौपचारिक सम्मेलन में चर्चा करने के लिए पर्याप्त व पूर्ण अवसर मिलेंगे। माननीय विधि मंत्री, उनको जितना अब सुन सकते हैं उससे ज्यादा ध्यान से सुनेंगे, इसलिए हमें यह विषय समाप्त कर देना चाहिए। परन्तु हम इसे कब शुरू करेंगे? यह महत्वपूर्ण विषय है।

एक माननीय सदस्यः परसों।

माननीय अध्यक्षः जब हम इसे शुरू करेंगे तो माननीय विधि मंत्री भाषण देंगे। माननीय सदस्यों को समझना होगा कि हम यह सत्र 20 तक समाप्त करना चाहते हैं।

एक माननीय सदस्यः 21 तक।

ऽऽसं. वा., खंड 7, भाग II, 13 दिसंबर, 1950, पृष्ठ 1716

ऽऽऽसं. वा., खंड 7, भाग II, 14 दिसंबर, 1950, पृष्ठ 1716-80