180 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
डॉ. अम्बेडकरः मैं विधेयक पुरःस्थापित करता हूँ।
लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयकµ जारी
ऽमाननीय उपाध्यक्षः क्या मैं नियोजक दायित्व विधेयक अथवा लोक प्रतिनिधित्व विधेयक लूँ।
प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री (श्री जवाहर लाल नेहरू)ः लोक प्रतिनिधित्व विधेयक के कुछ भाग पर ही बहस हुई है। अब हम उसे फिर आरंभ करेंगे।
विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर)ः महोदय, आपको स्मरण होगा कि इस विधेयक के विचारार्थ पिछली बार जब प्रस्ताव पर बहस चल रही थी तो माननीय अध्यक्ष ने सुझाव दिया था कि इस बहस को स्थगित कर दिया जाए ताकि मुझे और भाग ‘ग’ राज्यों में रुचि रखने वाले सदस्यों को बैठक करने का एक अवसर मिल सके और एक विशिष्ट योजना तैयार की जा सके जिस पर मेरे और भाग ‘ग’ राज्यों के प्रतिनिधियों के बीच एक सहमति बन सके।
(माननीय अध्यक्ष पीठासीन)
मैंने यह सुझाव स्वीकार कर भाग ‘ग’ राज्यों के सदस्यों तथा इस विधेयक में थोड़ी-बहुत रुचि रखने वाले सदन के अन्य सदस्यों के साथ एक दो बार बैठक है। जैसा कि आपको स्मरण होगा, महोदय जब बहस चल रही थी, यह पाया गया था कि मेरे और भाग ‘ग’ राज्यों पर बोलने वाले सदस्यों में तीन बिन्दुओं पर मतभेद था। ये तीन बिन्दु निम्नवत थे-
अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली_
मणिपुर व त्रिपुरा का नामांकन_ तथा
चक्रानुक्रम द्वारा प्रतिनिधित्व।
मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि विचारों के आदान-प्रदान से यह नियम बना है जिसके द्वारा नगरपालिकाओं, स्थानीय बोर्डों, ग्राम पंचायतों इत्यादि के अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली विषयक उपबंधों और नामांकन द्वारा मणिपुर और त्रिपुरा के प्रतिनिधित्व विषयक उपबंध को भी निकालना मेरे लिए संभव हो गया है। जहाँ तक तीसरे बिन्दु अर्थात् चक्रानुक्रम द्वारा प्रतिनिधित्व का प्रश्न है, इसका हल ढूंढना संभव नहीं है। अतः यह मूल विधेयक का हिस्सा होगा। इस समझौते के अनुसार अब मैंने कुछ संशोधनों के नोटिस दिए हैं जो कि सदस्यों के हाथों में पहले से ही हैं। यह अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली का स्थान लेगा। अब मेरा प्रस्ताव है कि सदन वयस्क मताधिकार द्वारा एक निर्वाचक
ऽसं. वा., खंड 7, भाग II, 21 दिसंबर, 1950, पृष्ठ 2209-10