182 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अधिनियम, 1950 (जिसे आगे उक्त अधिनियम कहा जाएगा) के दीर्घ शीर्षक में ‘निर्वाचक नामावली तैयार करने’ शब्दों के बाद फ्भाग ‘क’ राज्यों के प्रतिनिधियों द्वारा भरी जाने वाली राज्य परिषदों की सीटें भरने की पद्धतिय् शब्द और अक्षर अंतः स्थापित किए जाएंगे।’’
µ(डॉ. अम्बेडकर)
डॉ. अम्बेडकरः उद्देशिका को वर्तमान विधेयक के अनुरूप लाना है।
माननीय अध्यक्षः प्रश्न हैः
फ्कि यथासंशोधित खंड 2, इस विधेयक का हिस्सा बन गया है।य्
प्रस्ताव अंगीकार किया गया। यथासंशोधित खंड 2 इस विधेयक में जोड़ा गया।
खंड 3 (धारा 2 का संशोधन)
संशोधन किया गयाः
खंड 3 में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 2 के प्रस्तावित नए खंड (ग ग) के स्थान पर निम्नांकित रखेंः
फ्(ग ग) राज्य परिषद के निर्वाचन-क्षेत्रों से वह निर्वाचन-क्षेत्र अभिप्रेत है जो धारा 27 ‘क’ में उल्लिखित किसी भाग ‘ग’ राज्य या ऐसे राज्यों के समूहों के लिए निर्वाचक मंडल के सदस्यों के निर्वाचन-उद्देश्यार्थ धारा 27 ग के अधीन किए गए किसी आदेश द्वारा उपबंधित कराया गया है।य्
µ(डॉ. अम्बेडकर)
डॉ. अम्बेडकरः महोदय यह केवल इसलिए है कि इसे निर्वाचन-मंडल के माध्यम से निर्वाचन के लिए नई योजना के समनुरूप लाया जाए।
माननीय अध्यक्षः इस विधेयक को समग्र रूप से पुरःस्थापित किया गया है और इसीलिए प्रत्येक खंड सदन के समक्ष है। यदि कोई माननीय सदस्य इसके खंड मे कोई संशोधन पेश करना के लिए उत्सुक हो, तो मैं समझता हूँ कि अध्यक्ष उस खंड को इस सदन के समक्ष रखने के लिए बाध्य है।
श्री एम.ए. अय्यंगरः जब तक कि इसे प्रस्तावक द्वारा न लिया जाए।
माननीय अध्यक्षः सदन के समक्ष पूर्ण विधेयक को एक बार रखे जाने के बाद वह इसे इस तरह वापस नहीं ले सकते। इस खंड को सदन द्वारा अस्वीकार किया जाना होगा। किंतु तब मैं अनौपचारिक प्रक्रिया का पालन कर रहा था जिससे चर्चा संक्षिप्त हो सके। मैं समझता हूँ श्री कामथ अपना संशोधन नहीं रख रहे हैं।