24. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 205

190 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

दूसरे, जैसाकि माननीय सदस्य देखेंगे, यह योजना क्रियाशील नहीं हो सकती, क्योंकि जिस संशोधन का मैंने प्रस्ताव रखा है उस संशोधन में मैंने उपबंध किया है कि यदि संसद विधायी निकायों के गठन की कानून द्वारा व्यवस्था करती है जैसाकि अन्य भाग ‘ख’ तथा भाग ‘क’ राज्यों में किया जाता है, तब चुनाव नवसृजित निकायों के आधार पर होंगे। इन तथ्यों के प्रति सम्मान रखते हुए मैं इस निर्णय को अत्यधिक महत्व देता हूं, भले ही यह इस तरीके से लिया जाए या अन्य तरीके से, क्योंकि मैं अनुभव करता हूँ कि यदि पर्याप्त दबाव हो और यदि पर्याप्त समय हो तो संसद को चुनाव होने से पहले इस बात के लिए राजी किया जा सकता है कि वह स्वयं विधायिकाओं की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले और अनुच्छेद 240 को प्रभावी बनाए। इसलिए वर्तमान में मैं जिस बात पर बल देना चाहूंगा वह यह है कि ‘निर्वाचित’ शब्द हटा दिया जाए। और संभवतः मैं चाहूंगा कि नई दिल्ली के संबंध में जहां मैं समझता हूं अत्यधिक नामांकन होता है, मैं नई दिल्ली के प्रतिनिधित्व को गैर-सरकारी सदस्यों तक सीमित रखूंगा। मैं समझता हूं कि इससे सदन को फिलहाल संतुष्ट हो जाना चाहिए।

श्री सोंढीः अन्य निकायों के गैर-सरकारी सदस्यों का क्या होगा? हमें एक-दूसरे निकाय के बीच अंतर नहीं करना चाहिए।

डॉ. अम्बेडकरः अन्य भाग ‘ग’ राज्यों के अन्य निकायों की दशा में, हमें इस समय गहराई में जाने की आवश्यकता नहीं है। हम............के आधार पर निर्वाचक-मंडल बनाने जा रहे हैं।

श्री सोंढीः मैं गैर-सरकारी सदस्यों का हवाला दे रहा था जो अन्य निकायों के लिए नामित किए जाते हैं। माननीय मंत्री जी ने केवल नई दिल्ली में नामित सदस्यों का हवाला दिया। हम उनके बीच अंतर नहीं कर सकते।

डॉ. अम्बेडकरः नई योजना के अन्तर्गत संभवतः गैर-सरकारी सदस्यों का अस्तित्व ही मिट जाएगा।

माननीय अध्यक्षः हमें इस चर्चा को और आगे नहीं बढ़ाना चाहिए।

श्री देशबंधु गुप्ताः माननीय विधि मंत्री ने कहा था कि ‘निर्वाचित’ शब्द को हटाकर उसके स्थान पर दिल्ली और नई दिल्ली के लिए ‘गैर-सरकारी निकाय’ कर देना चाहिए। क्या यही उनकी इच्छा है?

डॉ. अम्बेडकरः जी हां, इससे मामला सरल हो जाएगा।

श्री त्यागीः लेकिन यह स्पष्ट करना होगा कि विधि मंत्री ने इसे इस शर्त और इस आशा से स्वीकार किया है कि नए चुनाव वयस्क मताधिकार के आधार पर होंगे और यह कि वे आम चुनावों के समय पर कराए जाएंगे। हम जानते हैं कि इन पुराने