192 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
चाहिए। यदि हम ‘जैसेकि’ शब्दों को रखते हैं, तो इसका अर्थ होगा कि स्थानीय निकायों की अन्य श्रेणियां हैं जिनका आप हवाला देना चाहते हैं।
श्री देशबंधु गुप्ताः उन शब्दों को रखे जाने का कारण दिल्ली सुधार ट्रस्ट है।
डॉ. अम्बेडकरः परन्तु मेरी प्रति में यह शब्द नहीं है।
माननीय अध्यक्षः श्री देशबंधु गुप्ता अपना संशोधन वापस लें और माननीय मंत्री अपना संशोधन रखें।
डॉ. अम्बेडकरः मैं इसे कुछ संशोधनों के साथ स्वीकार कर रहा हूँ और इसे अनुच्छेद 27 झ. के उप-खंड (5) के रूप में रख रहा हूँ।
माननीय अध्यक्षः क्या माननीय सदस्य श्री देशबंधु गुप्ता को यह तरीका पसंद है?
श्री देशबंधु गुप्ताः जी हाँ।
प्रस्ताव अनुमति से वापस लिया गया।
डॉ. आर.यू. सिंहः महोदय, मैंने कुर्ग का मामला उठाया था और यह अनुत्तरित है।
माननीय अध्यक्षः कोई भी सदस्य कुछ भी प्रश्न कर सकता है परंतु मंत्री के लिए यह आवश्यक नहीं है कि वे सभी प्रश्नों के उत्तर दें। अब हमें आगे का काम जितनी जल्दी निपटा सकें, निपटाना चाहिए। मंत्री इस संशोधन को पूरी तरह से स्वीकार कर रहे हैं।
डॉ. अम्बेडकरः मैं उस संशोधन को रखता हूँ जिसका नोटिस मैंने अभी-अभी दिया है। यह पूरी तरह सांकेतिक एवं अनुवर्ती है तथा मैं श्री देशबंधु गुप्ता के संशोधन को भी अपने संशोधन में शामिल करने का प्रस्ताव रखता हूँ।
माननीय अध्यक्षः इन संशोधनों के मामले में बेहतर रहेगा कि उन्हें पढ़ दिया जाए। मुझे थोड़ी-सी कठिनाई यह हो रही है कि इन्हें सदस्यों को परिचालित नहीं किया गया है। अतः हमारे सामने अनुकल्पिक तरीके ये हैं कि या तो ये संशोधन सदन में पढ़े जाएं या हम इस खंड को स्थगित करें तथा अगला खंड लें और इसे लम्बित रखें। केवल एक खंड-खंड II बचता है। इसके बाद इस अनुसूची में डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तावित संशोधन है। इसे निपटाया जा सकता है।
श्री जवाहर लाल नेहरूः इन संशोधनों को क्यों न पढ़ दिया जाए?
माननीय अध्यक्षः खंड II के निपटान एवं डॉ. अम्बेडकर द्वारा इस संशोधन के