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माननीय अध्यक्षः हाँ, क्या वह दूसरा संशोधन भी रखेंगे?
डॉ. अम्बेडकरः यह स्वतन्त्र संशोधनµएक खंड का जोड़ा जाना था। मेरे दूसरे संशोधन में श्री गुप्ता का संशोधन भी शामिल होगा।
परिवहन तथा रेल राज्य मंत्री (श्री सन्तानम)ः मेरे विचार से सभी संशोधन सदन के समक्ष रखे जा चुके हैं। उन्हें केवल अंगीकार करना है।
माननीय अध्यक्षः जो संशोधन बाद में आए थे, उन्हें सदन के समक्ष नहीं रखा गया है।
डॉ. अम्बेडकरः मैं संशोधन को औपचारिक रूप से रखना चाहूँगा। मैं रखने की अनुमति चाहता हूँः
प्रस्तावित नए खंड 10-ख में मेरे द्वारा प्रस्तावित संशोधन में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की प्रस्तावित नई धारा 27-झ के बाद निम्नांकित नई धारा 27-झ जोड़ी जाए और उत्तरवर्ती धारा को धारा 27-ट के रूप में पुनः संख्यांकित किया जाएः
फ्27-×ा निर्वाचक मंडल या कुर्ग विधान परिषद की उनमें हुई रिक्तियों के बावजूद निर्वाचित करने की शक्ति किसी निर्वाचक मंडल के सदस्यों या कुर्ग विधान परिषद के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किसी निर्वाचन पर उस मंडल या परिषद, जैसी भी स्थिति हो, की सदस्यता में कोई रिक्ति होने मात्र के आधार पर, इस अधिनियम के अधीन कोई सवाल नहीं उठाया जाएगा।य्
यह केवल किसी संभावित कठिनाई या संदेह को दूर करने के लिए है।
माननीय अध्यक्षः संशोधन रखा गया (यथोक्त)।
और भी संशोधन हैं।
डॉ. अम्बेडकरः हाँ, अनुपूरक सूची सं. 8 में, मैंने सोचा कि पहले यह निपट जाए, उसके बाद दूसरे रखूँगा।
माननीय अध्यक्षः मैं समझता हूँ कि इस संशोधन पर सहमति है क्योंकि सभी माननीय सदस्य इससे सहमत हैं। क्या मैं इसे सदन के समक्ष रखूँ?
परिवहन तथा रेल मंत्री (श्री गोपालास्वामी)ः क्या मैं आपका ध्यान इस ओर आकर्षित कर सकता हूँ कि यदि आप दिल्ली के लिए प्रस्तावित अन्य प्रकार की निर्वाचन पद्धति स्वीकार करने जा रहे हैं, तब क्या इस संशोधन में कुछ उपान्तरण करने की आवश्यकता नहीं है?