198 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
डॉ. अम्बेडकरः उसे भी निर्वाचक-मंडल कहा जाता है।
श्री गोपालस्वामीः क्या ऐसा है?
डॉ. अम्बेडकरः हाँ।
माननीय अध्यक्षः प्रश्न हैः
प्रस्तावित नए खंड 10-ख में डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तावित संशोधन में, लोक जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की प्रस्तावित नई धारा 27-झ के बाद निम्नांकित नई धारा 27-×ा जोड़ी जाए और इस उत्तरवर्ती धारा को धारा 27-ट के रूप में पुनः संख्यांकित किया जाएः
फ्27-झ निर्वाचक मण्डलों या कुर्ग विधान परिषद की उनमें हुई रिक्तियों के बावजूद निर्वाचित करने की शक्तिµइस अधिनियम के अंतर्गत किसी निर्वाचक मंडल के सदस्यों या कुर्ग विधान परिषद के निर्वाचित सदस्यों द्वारा इस मंडल या परिषद, जैसी भी स्थिति हो, की सदस्यता में कोई रिक्ति होने मात्र के आधार पर किसी निर्वाचन पर सवाल नहीं उठाया जाएगा।य्
प्रस्ताव अंगीकार किया गया।
माननीय अध्यक्षः मुझे विश्वास है कि धारा 27-क से 27-×ा तक को शामिल करने वाले संशोधन को पहले ही रखा जा चुका है। अब मैं अनुपूरक सूची सं. 8 के संशोधनों को लेता हूँ।
डॉ अम्बेडकरः मैं समझता हूँ अच्छा यह रहेगा कि मैं उन्हें क्रमवार रखूँ।
माननीय अध्यक्षः अनुपूरक सूची सं. 8 के संशोधन उस संशोधन हैं जिन्हें रखा जाना है। मेरा विचार यह है कि बजाय इसके कि पूरे खंड को तत्काल रख दिया जाए, इन सभी संशोधनों को सदन के समक्ष एक बार रखा जाए और इसके बाद हम हिस्सों में चर्चा एवं मतदान के लिए आगे बढ़ें।
डॉ. अम्बेडकरः मैं इन्हें रखने की अनुमति चाहता हूँ।
( i ) मेरे द्वारा प्रस्तावित संशोधन में, प्रस्तावित नए खंड 10-ख में, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की प्रस्तावित नई धारा 27 ‘क’ की उप-धारा (3) में पंक्ति 2 में आने वाले शब्दों फ्किसी राज्य या राज्यों के समूहय् के बाद फ्इस प्रकार विनिर्दिष्टय् शब्द रखे जाएं।
( ii ) मेरे द्वारा प्रस्तावित संशोधन में, प्रस्तावित नए खंउ 10-ख में, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की प्रस्तावित नई धारा 27-क की उप-धारा (4) में फ्निर्वाचक मंडलय्