24. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 215

200 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

( iii ) छठी पंक्ति में आने वाले फ्गठनय् शब्दों के बाद फ्ऐसा निकाय याय् शब्द जोड़े जाएं।

मैं चाहूँगा कि माननीय विधि मंत्री यह बिन्दु स्पष्ट करें।

डॉ. अम्बेडकरः इस संशोधन को लेकर दो आपत्तियां हैं। पहली आपत्ति सांविधानिक है जो संविधान के अनुच्छेद 240 में उल्लिखित उपबंधों के कारण है। मैं समझता हूँ मेरे माननीय मित्र डॉ. परमार के संशाधेन से यह स्पष्ट है कि वे यह मानते हैं कि संसद के लिए हिमाचल प्रदेश और बिलासपुर जैसे दो क्षेत्रों के लिए एकल विधायिका (विधानमंडल) बनाना संभव हो जाएगा। मेरा निवेदन है कि संसद के लिए ऐसा कुछ भी कर पाना सहज नहीं होगा, क्योंकि अनुच्छेद 240 का कहना हैः

फ्संसद प्रथम अनुसूची के भाग-ग में विनिर्दिष्ट किसी राज्य के विधि बनाकर सर्जित कर सकती है या उसे जारी रख सकती है.........य् जिसका अर्थ यह हुआ कि यद संसद भाग-ग में उल्लिखित राज्यों के लिए विधायी निकाय बनाना चाहती है, तो उसे प्रत्येक भाग -ग राज्य के लिए एक अलग विधायी निकाय बनाना होगा। अनुच्छेद 240 संयुक्त विधायिका के गठन का अधिकार नहीं देता। इस आधार पर यह संशोधन ठीक नहीं है।

मेरा दूसरा निवेदन यह है कि मैं समझता हूँ कि मेरे माननीय मित्र का सुझाव था कि बिलासपुर हिमाचल प्रदेश में विलय हो जाएगा और ऐसी स्थिति में एक राज्य बन जाएगा। इस संभावना से मैं इनकार नहीं करता, किंतु इसका परिणाम यह होगा कि हमें इस विधेयक में संशोधन करना पड़ेगा और बिलासपुर को विलीन राज्य बनाना पड़ेगा, जो बिल्कुल अलग स्थिति है और संसद के समक्ष प्रस्तुत इस विधेयक के अन्तर्गत किसी प्रकार नहीं आता।

अतः मेरा निवेदन है कि मैंने जो आपत्ति उठाई है, उसके चलते मैं इस संशोधन को स्वीकार नहीं कर सकता।

श्री जे.एन. हजारिका (असम)ः महोदय, धारा 27-×ा जिसे अभी-अभी धारा 27-ट के रूप में संख्यांकित किया गया है, पूरी तरह आवश्यक है क्योंकि इस खंड से.............पैदा होने की संभावना है।

माननीय अध्यक्षः माननीय सदस्य किसका हवाला दे रहे हैं?

श्री जे.एन. हजारिकाः धारा 27-×ा का। इससे भाग-ग राज्यों के लोगों के दिमाग में कुछ भ्रम पैदा हो सकता है।

माननीय अध्यक्षः माननीय सदस्य कृपया देखें कि धारा 27-×ा को अभी सदन