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पण्डित मित्रा (पश्चिम बंगाल)ः कोरम क्या होगा?
डॉ. अम्बेडकरः मैं समझता हूँ कोरम नियमावली में दिया हुआ है अर्थात् एक-तिहाई।
महोदय, जैसा कि सदस्यों ने देखा होगा यह विधेयक बहुत लम्बा है और इसमें 163 खंड हैं। यदि मुझे इन 163 के विविध उपबन्धों के सम्पूर्ण विवरण को देखना पड़ा तो मुझे इस प्रस्ताव के विचारार्थ इस समय उपलब्ध समय से कहीं अधिक समय चाहिए। यह विधेयक पहले से ही तीन या चार दिनों से संसद-सदस्यों के पास है और मुझे विश्वास है कि उन्होंने इस विधेयक के खंडों को पढ़ लिया होगा और इसमें शामिल खंडों के मुख्य उद्देश्यों को समझ लिया होगा। अतः मैं समझता हूँ कि मुझे इस विधेयक में शामिल विषयों का पूरा
खुलासा करने की आवश्यकता नहीं है। अतः मैं बहुत ही संक्षेप में प्रस्ताव रखता हूँ।
सदन को याद होगा कि संसद के इससे पहले वाले सत्र द्वारा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के लिए एक विधेयक पारित किया गया था। इस विधेयक में निम्नांकित सम्मिलित थेः (1) लोक सभा तथा राज्य सभा में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों के बीच सीटों का बंटवारा_ (2) लोक सभा तथा विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव के लिए निर्वाचन-क्षेत्रों का परिसीमन_ (2) ऐसे चुनावों में मतदाताओं की अर्हताएं_ तथा (4) मतदाता-सूची एवं निर्वाचन-क्षेत्रों का निर्धारण।
निम्नांकित विषय छूट गए थेः (1) विधानमंडल उम्मीदवारों की तथा उसके सदस्यों की अर्हताएं तथा निरर्हताएं_ (2) चुनावों को वास्तविक रूप से कराया जाना_ (3) भ्रष्ट तथा अवैध आचरण_ (4) चुनाव अपराधों की परिभाषा_ (5) चुनावी विवादों का विनिश्चय करने के लिए निर्वाचन अधिकरण का गठन।
मुझे स्वयं इस बात से अत्यंत खुशी होती यदि पिछले विधेयक एवं इस विधेयक में शामिल उपबंधों को एक ही संविधि (कानून) में शामिल कर लिया गया होता ताकि माननीय सदस्यों को एक ही संविधि की सुविधा मिल जाती जिसमें केन्द्रीय विधायिका तथा राज्य विधानमंडल में जन प्रतिनिधित्व विषयक सभी विषय होते। परंतु दुर्भाग्यवश, ऐसा करना संभव नहीं हो पाया, क्योंकि ऐसा करने में बहुत लम्बा समय लगता, अतः यह अनुभव किया गया कि इस विषय को दो भागों में रखा जाए अर्थात् निर्वाचन-क्षेत्रों, मतदाताओं की अर्हताओं और इसी प्रकार अन्य के मामले में शीघ्र उपाय किए जाएं ताकि चुनाव आयोग अप्रैल या मई तक चुनाव प्रक्रिया आंरभ करने की दृष्टि से कार्यरंभ कर सके। यही कारण था कि इस विधेयक में सम्मिलित विषयों का अभिन्न अंग होते हुए भी विषय के कुछ हिस्सों को अलग रखा गया और उसे एक पूर्ववर्ती विधान में रखा गया।
महोदय, जैसाकि मैं कह चुका हूँ, वर्तमान विधेयक पांच विषयों से सम्बद्ध है। मुझे विश्वास है कि सदन मुझसे यह उम्मीद नहीं करेगा कि मैं इन पाँचों भागों के प्रत्येक