206 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
से संबंधित उपबंधों के पूरे सप्तक की छानबीन करूँ। मैं केवल कुछ महत्वपूर्ण उपबंध लूँगा और मुझे विश्वास है कि सदन इस स्तर पर जानने का इच्छुक होगा।
अब, मैं सबसे पहले, उम्मीदवारों की अर्हताओं एवं निरर्हताओं के प्रश्न पर आता हूँ। जहां तक उम्मीदवारों के चुनाव का सवाल है, हम कोई अतिरिक्त अर्हता नहीं लादना चाहते सिवाय इसके कि वह मतदाता होना अर्थात् वह नागरिक होना, वह 21 वर्ष का होना और अर्हक अवधि तक उस निर्वाचन-क्षेत्र विशेष में रहने वाला होना। इस प्रकार हर मतदाता बिना किसी अतिरिक्त अर्हता को पूरा किए उम्मीदवार के रूप में खड़ा हो सकेगा। इस संबंध में जिस एक दूसरे विषय की ओर मैं ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा वह यह है कि वर्तमान विधेयक में हमने सभी आवासीय अर्हताओं को हटा दिया है। माननीय सदस्यों को याद होगा कि एक समय था जब किसी उम्मीदवार के लिए केवल मतदाता होना ही आवश्यक नहीं था वरन् उसे उस निर्वाचन-क्षेत्र विशेष का निवासी भी होना चाहिए था। अन्यथा वह खड़ा नहीं हो सकता था। इस तथ्य के मद्देनजर यह महसूस किया गया कि अब हम एक राष्ट्र हैं और हमारा एक संविधान है तथा हम जाति, पन्थ, समुदाय या प्रान्तीय सीमाओं को मान्यता नहीं देते हैं, अतः यह वांछनीय है कि जो व्यक्ति उम्मीदवार होने का पात्र है, वह भारत के किसी हिस्से से खड़ा हो सकता है भले ही वह उस प्रान्त या निर्वचन-क्षेत्र का न हो।
(उपाध्यक्ष ‘पीठासीन’)
इस प्रकार इस विधेयक के उपबंधों के अन्तर्गत, कोई व्यक्ति न केवल अपने निर्वाचन-क्षेत्र से खड़ा हो सकता है वरन् वह अपने राज्य के किसी भी निर्वाचन-क्षेत्र से खड़ा हो सकता है, यही नहीं, वह किसी भी ऐसे अन्य राज्य में उम्मीदवार के रूप में खड़ा हो सकता है जहाँ वह निवास नहीं करता बशर्ते कि वह किसी निर्वाचन-क्षेत्र विशेष का मतदाता हो। अर्हताओं के संबंध में यही है।
निरर्हताओं के संबंध में हमने जो कुछ किया है वह यह है कि अब तक निरर्हता से संबंधित कानून अलग-अलग संविधियों में अलग-अलग था। इसका एक हिस्सा भारत शासन अधिनियम, 1935 के पारित होने के बाद मंत्री द्वारा जारी किए गए भारत सरकार (प्रान्तीय चुनाव, भ्रष्ट आचरण तथा चुनाव अर्जी) आदेश, 1938 में दिया गया था। अन्य उपबंध भारतीय चुनाव अपराध जाँच अधिनियम, 1920 में पाए जाते थे। अतः यह अनुभव किया गया कि अच्छा रहेगा कि इस अधिनियम में निरर्हताओं को समेकित कर दिया जाए। और इसमे यही सब कुछ किया गया है।
मैं यहाँ यह उल्लेख करना चाहूँगा कि मेरा प्रस्ताव था कि सरकार के साथ संविदा रखने को भी निरर्हता का मामला माना जाए। यह उपबंध यूनाइटेड किंगडम अधिनियम में दिया हुआ है। किंतु मैंने सोचा कि इस उपबंध विशेष के मामले में प्रवर समिति से