24. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 224

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ताकि उन्हें इस अधिकरण के सदस्यों के रूप में रखा जा सके। यह पुनः इस मान्यता पर आधारित है कि अर्जियों की संख्या इतनी अधिक हो सकती है कि न्यायिक सदस्य भी इसके लिए कम पड़ सकते हैं (व्यवधान) मैं समझता हूँ कि अच्छा रहेगा कि हम अधिवक्ताओं के लिए भी कुछ रोजगार रखें क्योंकि उन अनेक टिप्पणियों के बावजूद जो मैं सुनता रहा हूँ, मैं यूं पूरे दावे के साथ कहता हूँ कि सभ्यता का अस्तित्व अधिवक्ताओं से ही संभव है। कानून किसी भी सभ्यता की नींव होता है।

जैसा कि मैंने कहा, इस विधेयक में यह उपबंध है कि यदि अधिकरण में मतभेद हो जाता है तो निर्देश उच्च न्यायालय को भेजा जा सकता है। मैं समझता हूँ कि इस विधेयक की दूसरी बहुत ही महत्वपूर्ण विशेषता यही है। मैं चुनाव अर्जियों संबंधी कानून से भली-भांति परिचित नहीं हूँ। मेरा इनसे बहुतु अधिक सम्बन्ध नहीं रहा है। जो कुछ भी थोड़ा अनुभव मेरे पास है, उसके आधार पर मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचा हूँ कि यह कानून बहुत ही अनिश्चित स्थिति में है। आप यह निश्चित तौर पर कभी नहीं कर सकते कि किसी चुनाव अर्जी के निपटारे के तरीके क्या होंगे। आप कभी भी निश्चित तौर पर यह नहीं कह सकते कि किसी चुनाव को किन आधारों पर शून्य घोषित कर दिया जाएगा। आप कभी निश्चित नहीं हो सकते कि किन आधारों पर किसी विशेष उम्मीदवार के चुनाव की घोषणा की जाएगी। वर्तमान कानून के अंतर्गत आप कभी निश्चित नहीं हो सकते कि किन-किन मामलों में न्यायालय प्रत्यारोप की दलील को सुन सकते हैं। इसलिए इस स्थिति को स्पष्ट करने के लिए मैंने पर्याप्त समय और ध्यान दिया है और मैं माननीय सदस्यों का ध्यान खड 93, 95 तथा 96 की ओर आकर्षित करना चाहूँगा जिनमें वे पाएंगे कि इस स्थिति को यथासंभव स्पष्ट कर दिया गया है और मैं समझता हूँ कि अधिकरण तथा चुनाव लड़ने वाले स्वयं उम्मीदवारों दोनों के लिए यह बहुत ही लाभकारी होगा।

अब मैं भ्रष्ट तथा अवैध व्यवहार के कानून पर आता हूँ। यहाँ फिर यह कानून अलग-अलग स्थानों पर बिखरा हुआ है। मैंने भ्रष्ट व्यवहार तथा अवैध व्यवहार संबंधी इन सभी उपबंधों को इस विधेयक के अन्तर्गत लाने का प्रयास किया है और इन्हें धारा 122 से आगे संहिताबद्ध पाएंगे। जहाँ तक भ्रष्ट आशय का प्रश्न था, हमारा यह कानून कुछ हद तक दोषपूर्ण था। इस कानून में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि भ्रष्ट व्यवहार की स्थिति में किस आचरण को भ्रष्ट घोषित करना आवश्यक है। अवैध व्यवहार के संबंध में आशय का तो कोई सवाल ही नहीं है_ यह आचरण बुरा माना ही जाता है_ परंतु भ्रष्ट आचरण के संबंध में अपराधी का पता लगाने के लिए यह पता लगाना आवश्यक है कि आशय भ्रष्ट था। जब चुनाव चल रहा हो उस समय आप अपने मित्र को रात्रि भोज या मध्याह्न भोज पर बुला सकते हैं। आपका प्रतिद्वन्द्वी कह सकता है कि आपने उसे भ्रष्ट कर दिया है। मैं नहीं समझता कि इस प्रकार की दलील ठहर सकती है। किन्तु वर्तमान कानून के अंतर्गत यह परन्तुक नहीं था और मैंने इस पूरी बात को स्पष्ट करने