210 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
की कोशिश की है क्योंकि मुझे पता चला है कि आंग्लविधि में भी यह उपबंध है कि भ्रष्ट आचरण में भ्रष्ट आशय होना आवश्यक है।
मुझे मालूम है कि सदन यह जानने के लिए ज्यादा उत्सुक है कि स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव करनें के लिए इस विधेयक में क्या उपबंध किए गए हैं। इसलिए मैं समझता हूँ कि यह सभी की इच्छा है और इसीलिए मैं सदन के समक्ष उन उपबंधों को रखता हूँ जो स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष चुनावों से संबंधित हैं और जिनका आश्य स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सम्पन्न कराना है।
(1) चुनाव के दिन तथा चुनाव के ऐसे दिन के पूर्ववर्ती दिन सभी चुनावी बैठकों (सभाओं) पर रोक लगा दी गई है। हमने सोचा है कि मतदान केन्द्रों पर जाने से पहले मतदाताओं एवं उम्मीदवारों को दो शांतिपूर्ण रातें देना वांछनीय होगा।
(2) चुनाव-सभाओं में गड़बड़ी करने के लिए शास्ति की व्यवस्था की गई है, जो मेरे विचार में बहुत वांछनीय है।
(3) किसी चुनाव के संबंध में किसी डड्ढूटी को पूरा करने वाले अधिकारियों एवं पुलिस पर उम्मीदवारों के लिए काम करने या मतदाताओं को प्रभवित करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह खंड 124 में दिया गया है।
(4) मतदान केन्द्रों में और उनके आसपास प्रचार पर प्रतिषेध लगा दिया गया है।
(5) मतदान केन्द्रों में या उनके आसपास मेगा-फोन या लाउडस्पीकार के उपयोग या चिल्लाने जैसे गड़बड़ी फैलाने वाले आचरण के लिए शास्ति की व्यवस्था की गई है।
(6) यह एक महत्वपूर्ण बात है। मतदाताओं को मतदान केन्द्रों तक जाने या वहाँ से वापस ले जाने के लिए वाहनों को किराए पर लेने या प्राप्त करने को दण्डनीय बना दिया गया है।
(7) चुनावों के संबंध में सरकारी डड्ढूटी भंग किए जाने को दण्डनीय बना दिया गया है।
(8) मतदान केन्द्र से मतपत्रों को ले जाने को भी अपराध बनाया गया है।
(9) प्रतिरूपण (वेश बदलना) को पूरे देश में एक संज्ञेय अपराध बनाया गया है, और आप देखेंगे कि इस विधेयक में और भी उपबंध हैं। यह भी उपबंध है कि प्रत्येक मतदाता को अमिट स्याही से अपने अंगूठे का निशान लगाना होगा। मुझे आशा है कि स्याही अमिट होगी क्योंकि इससे दूसरे व्यक्ति के नाम पर दूसरा मत डालने की घटना