26. दंत चिकित्सक (संशोधन) विधेयक - Page 233

218 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

निकाय द्वारा प्रदान किए गए हैं जिसने कार्य करना बंद कर दिया है। परिणामस्वरूप यह मौजूदा सरकार की जिम्मेदा है कि वह यह निर्णय ले कि दंत चिकित्सा में शिक्षा देने वाले एक स्कूल द्वारा प्रदान की गई डिग्रियां मान्यता योग्य हैं भी या नहीं। यह ऐसा मामला नहीं है जिसे धारा 10 की उप-खंड (2) के अंतर्गत बंगाल की परिषद पर छोड़ दिया जाए। शब्द फ्प्रदान करता हैय् है जिसका अभिप्राय है फ्जो इस समय भी प्रदान कर रहा हैय्, और वे डिप्लोमा नहीं जो पहले प्रदान किए जा चुके हैं। ऐसा होने के कारण यह मामला ऐसा नहीं हो सकता जो दंत चिकित्सा परिषद की शक्तियों के अधीन उस पर छोड़ दिया जाए और यदि हमें इस अनुसूची में संशोधन करना पड़े तो भी इसे कानून के द्वारा ही किया जाए। यही कारण है कि इस विधेयक में कानूनी उपबंध किया गया है ताकि इस विशेष मामले को इसमें शामिल किया जा सके।

अब बंगाल दंत चिकित्सक स्कूल के बारे में मैंने जो कहा है वह उस प्रश्न पर भी लागू होता है जिसे मेरे मित्र पंडित ठाकुर दास भार्गव ने उठाया था।

अब, मैं श्री कामथ द्वारा उठाए गए मुद्दे पर आता हूँ। उनके द्वारा उठाया गया पहला मुद्दा कमोवेश तकनीकी था। यदि मैंने उनकी बात सही समझी है तो उन्होंने कहा था कि कानूनी दृष्टि से रजिस्टर 28 मार्च, 1950 तक तैयार होना चाहिए था और यदि किसी व्यक्ति का नाम इस रजिस्टर में दर्ज नहीं है तो धारा 46 और 49 के उपबंधों के अधीन उसके विरुद्ध कुछ दंड लगाए जाते हैं, जबकि वह अध्यादेश जिससे संबंधित व्यक्ति को इन दंडों से छूट मिलती है, 29 मई, 1950 से लागू हुआ। इस प्रकार अब दो माह की अवधि बचती है जिसमें यदि किसी व्यक्ति का नाम रजिस्टर में दर्ज नहीं है और फिर भी चिकित्सा व्यवसाय जारी रखता है अथवा पदधारी है, उसके विरुद्ध कुछ दंड लगाए जा सकते थे। इन व्यक्तियों की स्थिति क्या है? मैं सोचता हूँ कि मेरे मित्र श्री कामथ ने यदि इस विधेयक में प्रस्तावित संशोधन की शर्तों को स्पष्ट रूप से पढ़ा होता तो उन्होंने देखा होता कि ये उपबंध कहते हैं किः

फ्उपर्युक्त अधिनियम की धारा 46 की उप-धारा (3) और धारा 49 की उप-धारा (1) में ‘दो वर्ष की अवधि’ शब्दों के स्थान पर ‘तीन वर्ष की अवधि’ शब्द रखे जाएंगे और हमेशा प्रतिस्थापित माने जाएंगे।य्

अतः यह स्पष्ट है कि यह मुद्दा वर्तमान खंउ में समुचित रूप से आ गया है।

श्री कामथः मेरा मुद्दा यह था कि यदि मार्च, 29 से मई, 29 तक इन दो माहों के दौरान किसी दंत चिकित्सक का नाम इस रजिस्टर में दर्ज किया गया है, तो इस अधिनियम के अधीन और चूंकि यह अध्यादेश लागू नहीं हुआ था, तब सरकार से मात्र एक कार्यकारी अनुदेश प्राप्त होने पर अभियोजन को अथवा दंत चिकित्सक पर लगाए जा रहे कुछ अन्य दंड को कैसे रोका जा सकता है?