220 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
तंत्र राज्यों की तुलना में अधिक दक्ष है, ने भी जोर दिया है कि इस काम के लिए उन्हें दो वर्ष दिए जाने चाहिएं। मेरे ख्याल से मेरे मित्र श्री कामथ के इस सुझाव को निरस्त करने के लिए इतना ही काफी होगा कि यह विधेयक इस देश के कुछ अंग्रेजों को संरक्षण प्रदान करने के लिए बनाया गया है।
मैं नहीं सोचता कि कोई भी ऐसा मुद्दा है जो उठाया गया हो और अपना उत्तर देते समय मैंने जिसके बारे में उल्लेख न किया हो। यह विधेयक अत्यन्त साधारण_ अविवादास्पद विधेयक है। यह केन्द्रीय सरकार की गलती के कारण नहीं उठा है अपितु प्रांतीय सरकारों द्वारा वहन किए गए अन्य बोझों के कारण उठा है कि वे इस अधिनियम के एक विशेष उपबंध को लागू करने के लिए समय नहीं निकाल सके। मैं नहीं समझता कि इस सिवाय इसके और कुछ कर सकते हैं कि कानून के इस अंश को प्रभावी बनाने के लिए प्रांतीय सरकारों की सहायता करें और दंत चिकित्सक अधिनियम को यथाशीघ्र लागू करें।
माननीय अध्यक्षः प्रश्न है किः
फ्दंत चिकित्सक अधिनियम, 1948 का संशोधन करने के लिए इस विधेयक पर विचार किया जाए।य्
प्रस्ताव अंगीकार किया गया।
विधेयक में खंड 2 जोड़ा गया।
खंड 3 (1948 के अधिनियम XVI की धारा 46 और धारा 49 में संशोधन)
श्री कामथः मैं निम्नलिखित प्रस्ताव रखने की अनुमति चाहता हूँः
फ्दंत चिकित्सक अधिनियम, 1948 की धारा 46 की उप-धारा (3) और धारा 49 की उप-धारा (1) के प्रस्तावित संशोधन में, खंड 3 में, तीन वर्ष के स्थान पर 2 वर्ष और 6 माह रखा जाए।य्
वर्तमान खंड को इसलिए जोड़ा गया है ताकि राज्य सरकारें इस अधिनियम, की धारा 46 और 49 के अधीन दंत चिकित्सकों का अपना रजिस्टर पूरा कर सकें। यह एक भूतलक्षी विधान है। ऐसी अवस्था में इस खंड में प्रयुक्त शब्द हैं फ्और इन्हें हमेशा प्रतिस्थापित हुआ समझा जाएगा।य् एक बात मेरी समझ से बाहर है कि कुछ सौ दंत चिकित्सकों का नाम इस रजिस्टर में दर्ज करने के लिए इतने अधिक समय की क्यों आवश्यकता है। इसलिए मैं मंत्री से पुनः पूछना चाहता हूँ कि दिनांक 29 मार्च, 1950 तक कितने दंतचिकित्सक रजिस्टर होने शेष है और प्रक्रिया की क्या स्थिति है। यह जानना हमारे लिए इसलिए आवश्यक है जिससे हम जान सकें कि रजिस्टर तैयार करने में कितना समय लगेगा। क्यों एक साल की मांग जरूरी है। यदि ये संख्या उपलब्ध हो जाती है तो हमें कितना समय चाहिए। इसके अभाव में किसी निष्कर्ष पर पहुँचना बहुत कठिन है।