26. दंत चिकित्सक (संशोधन) विधेयक - Page 237

222 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

लिए पात्र है तथा दूसरे राज्य में नहीं, केवल इसलिए कि वह राज्य रजिस्टर तैयार कर सका है। अतः मैं सोचता हूँ कि चूंकि सिद्धांत को बनाए रखना वांछनीय है। अतः मैं श्री सिधवा के संशोधन को स्वीकार नहीं किया जा सकता। आखिरकार अंतर केवल छह माह का है।

श्री सिधवाः मैं अपना संशोधन वापस लेने की अनुमति चाहता हूँ।

संशोधन अनुमति से वापस लिया गया।

माननीय अध्यक्षः प्रश्न है किः

फ्खंड 3 इस विधेयक का अंश बन गया है।य्

प्रस्ताव अंगीकार किया गया।

खंड 3 इस विधेयक में जोड़ा गया।

(उपाध्यक्ष पीठासीन)

खंड 4 (1948 के अधिनियम XVI , अनुसूची का संशोधन)

श्री त्यागी (उत्तर प्रदेश)ः मेरा संशोधन इस प्रकार हैः

दंत चिकित्सक अधिनियम, 1948 की अनुसूची के भाग प् की प्रस्तावित मद (2क) के स्थान पर, खंड 4 में, यह प्रतिस्थापित किया जाएः फ्(2क) कोई अन्य संस्थान जो दंत चिकित्सा में शिक्षा अथवा व्यावहारिक प्रशिक्षण दे रहा है, जिसे केन्द्रीय सरकार केन्द्रीय दंत चिकित्सक परिषद से परामर्श करके इस प्रयोजन के लिए और ऐसी शर्तों पर जो सरकार इसके लिए विहित करना ठीक समझे, मान्यता प्रदान कर सकेगी।य्

मैं यह स्वीकार करना चाहूँगा कि डॉ. अम्बेडकर दृढ़ निश्चयी हैं। वह अपने भाषण में पहले कह चुके हैं कि इस उप-खंड में वर्णित संगठन निष्क्रिय था, जबकि दंत चिकित्सकों की परिषद के एक सदस्य ने मुझे बताया कि इस संस्थान की स्थिति का पता लगाने के लिए एक समिति का गठन किया गया है और यह समिति इसकी कार्यप्रण् ाली पर पहले ही कार्य कर रही है। मैं इस संस्थान की निंदा नहीं करना चाहता। मैं यह नहीं जानता कि इसका स्तर कैसा है, मुझे व्यक्तिगत तौर पर इसकी कोई जानकारी नहीं है। अतः मैं इस संस्थान की प्रतिष्ठा को हानि नहीं पहुंचाना चाहता। किन्तु चूंकि जाँच चल रही है, बजाए इसके कि सारी संसद इस संस्थान को मान्यता प्रदान करे_ बेहतर होगा कि सरकार यह अधिकार अपने हाथों में रखे कि यह निर्णय लिया जाए कि..............।

डॉ. अम्बेडकरः हम इस संस्थान को किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं कर रहे हैं। हम इस संस्थान द्वारा 1940 में अर्थात् 8 वर्ष पहले प्रदान की गई डिग्रियों पर विचार कर रहे हैं।