224 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
काफी आन्दोलन हुआ और पश्चिम बंगाल सरकार ने स्थिति की जाँच करने का निर्णय लिया कि क्या इस कालेज में शिक्षा द्वारा अर्हता प्राप्त कोई व्यक्ति मान्यता प्राप्त करने योग्य है। वे इस नतीजे पर पहुँचे कि वर्ष 1940 से पहले इस संस्थान द्वारा अपनाए जाने वाले मानक ऐसे थे कि इन पर मान्यता प्रदान किए जाने के उद्देश्य से विचार किया जा सकता है। किन्तु उन्होंने पुनः कहा कि हालांकि स्तर बनाये रखा जाता था फिर भी यह पता लगा कि बहुत से लड़के बिना कुछ सीखे कुछ सत्रों में उपस्थित हुए और कुछ शर्तें पूरी कीं। अतः दो अतिरिक्त अर्हताएं आरंभ की गईं कि उसे न केवल 1940 से पहले डिप्लोमा प्राप्त होना चाहिए बल्कि उसने कॉलेज का छात्र होने के नाते कुछ शर्तें भी पूरी की हों। ऐसा करने के पीछे उद्देश्य यह था कि अर्हता वास्तविक और मान्यता योग्य हो इसी कारण ये प्रतिबंध लगाए गए। अपने स्वयं के निर्णय को प्रतिस्थापित करने के बजाय मैं व्यक्तिगत तौर पर स्वयं को पश्चिम बंगाल सरकार के हाथ में सौंपने को तैयार हूँ जो इस मामले को बेहतर जानती है तथापि, मेरी सहानुभूति दंत चिकित्सकों के साथ है।
विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर)ः इस अनुच्छेद के शब्द इस प्रकार हैं कि फ्राष्ट्रपति किसी कठिनाई को दूर करने के प्रयोननार्थ विशेषकर........इत्यादिय् फ्विशेषकरय् का तात्पर्य यह नहीं है कि उनके पास साधारण शक्ति नहीं है।
माननीय अध्यक्षः फ्कोई कठिनाईय् तथा फ्विशेषकरय् शब्दों को छोड़कर माननीय सदस्य व्यवस्था के प्रश्न को जहां तक मैं समझा हूँ, ऐसा प्रतीत होता है कि वे अनुच्छेद 392 का अर्थान्वयन राष्ट्रपति को भारत शासन अधिनियम के उपबंधों से संविधान के उपबंधों में संक्रमण को प्रयोजनार्थ अनुकूलन करने के लिए सशक्त करने के रूप में करते हैं। मुद्दा सारतः यही है।
डॉ. अम्बेडकरः ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि यह गलत व्याख्या है। मेरे माननीय मित्र द्वारा उठाया गया मुद्दा यह है कि अनुच्छेद 392 के अन्तर्गत केवल एकमात्र शक्ति जो राष्ट्रपति के पास है, वह भारत शासन अधिनियम, 1935 की किसी धारा के अनुकूलन तक सीमित है ताकि इसे संविधान के उपबंधों के समनुरूप बनाया जा सके। मेरा कहना यह है कि यह ठीक नहीं है, क्योंकि अनुच्छेद 392 के आरंभिक शब्द बिल्कुल सामान्य हैं, अर्थात् फ्राष्ट्रपति किसी कठिनाई को दूर करने के लिए हैय् और उसके बाद फ्विशेषकर इत्यादिय् आता है। मान लीजिए आप फ्भारत शासन अधिनियम, 1935 के उपबंधों से इस संविधान के उपबंधों से संक्रमण के संबंध में फ्विशेषकरय् शब्द को हटा देते हैं तो ये शब्द इस प्रकार होंगे फ्राष्ट्रपति किसी कठिनाई को दूर करने के लिए आदेश द्वारा..........इत्यादि।य्