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अधिसूचना से हटा दें जिससे कि वह एक सामान्य नागरिक बनकर रह जाए और उस पर वह सामान्य प्रक्रिया लागू हो जो प्रक्रिया इस सिविल प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत इस देश में प्रत्येक नागरिक पर लागू हो।
अन्य खंड केवल किसी संदिग्धता, कठिनाई आदि को दूर करने के लिए हैं। सबसे महत्वपूर्ण खंड, खंड 12 है और मेरे विचार से मैंने सदन को इस विधेयक द्वारा लाए गए संशोधनों के मूलभूत आधार के पक्ष में पर्याप्त स्पष्टीकरण दे दिया है।
माननीय अध्यक्षः प्रस्ताव रखा गयाः
फ्कि सिविल प्रक्रिया संहित, 1908 का संशोधन करने के लिए विधेयक पर विचार किया जाए।य्
ऽडॉ अम्बेडकरः इसमें ऐसी कोई बात नहीं है जिसके उत्तर की आवश्यकता हो। चूंंक कुछ मुद्दे उठाए गए हैं, अतः मैं अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहूंगा।
इस चर्चा में भाग लेने वाले पहले वक्ता ने कहा था कि किसी राज्य के परिजनों को प्रदान की जाने वाली उन्मुक्ति संबंधी इस विधेयक में दिए गए उपबंध अन्तरराष्ट्रीय राय के अनुरूप नहीं है। उन्होंने महसूस किया था कि उन्हें विश्वास है कि अन्तरराष्ट्रीय कानून के लेखकों में इस बात को लेकर एक राय है कि न केवल राजनय को वरन् उसके परिजनों को भी विशेषाधिकार मिलना चाहिए। खेद है कि मैं उनसे सहमत नहीं हूँ। मेरे सामने अन्तरराष्ट्रीय कानूनी संधियों के अनेक उदाहरण हैं। मैं उन्हें पढ़कर सदन को थकाना नहीं चाहता हूँ। मैं सदन को विश्वास दिलाता हूँ कि मेरे सामने रखे उद्दरणों में ऐसी कोई एक राय नहीं है। इसी आधार पर इस धारा को तैयार किया गया है। मेरे मित्र यह मानेंगे कि इन स्थितियों को स्पष्ट करने के तरीके कुछ भी हों, यदि इस खंड को इसके इसी रूप में रहने दिया गया तो परिणाम किसी भी तरीके से भिन्न नहीं होगा। क्योंकि भले ही उन्मुक्ति स्वयं इस धारा द्वारा दी जाए या फिर इस धारा के तहत जारी अधिसूचना द्वारा दी जाए, परिणाम बहुत भिन्न नहीं हो सकता।
उनका दूसरा मुद्दा था कि ‘शासक’ शब्द का उपयोग करने के लिए हमारे पास कोई औचित्य नहीं है। क्योंकि ऐसे भी राज्य प्रमुख हैं जिन्हें ‘शासक’ नहीं कहा जाता है। मैं उनका ध्यान इस तथ्य की ओर आकर्षित करना चाहूंगा कि इस खंड का प्रारूप तैयार करते समय हमने व्यावहारिक तौर पर उसी भाषा का अनुसरण किया है जो भाषा वर्तमान सिविल प्रक्रिया संहिता में अपनाई गई है। मैं उनका ध्यान सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 83, धारा 85, उप-खंडों (1) और (2) और धारा 86 के शीर्षक की ओर आकर्षित करना चाहूंगा, जहां वही शब्दावली उपयोग में लाई गई है जो शब्दावली हमने
ऽसं. वा., खंड 8, भाग II, 9 फरवरी, 1950, पृष्ठ 2646-62