27. सिविल प्रक्रिया संहिता (संशोधन) विधेयक - Page 246

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को लटकाकर रखना, उचित या उपयुक्त नहीं समझेगा जहाँ दावा बिल्कुल वास्तविक हो। मेरे दिमाग में बिल्कुल संदेह नहीं है क्योंकि ऐसे विषय से सम्बद्ध कोई भी सदस्य सदन के प्रति जवाबदेह होगा।

पंडित कुंज़रु (उत्तर प्रदेश)ः महोदय, इस समय एक से अधिक बज गया है।

माननीय उपाध्यक्षः यदि संभव हो तो हम इस समय पहला पाठ पूरा कर लेते हैं।

पंडित कुंज़रुः माननीय मंत्री को आधा घंटे का समय लगेगा।

माननीय उपाध्यक्षः माननीय मंत्री, कितना समय लेंगे?

डॉ. अम्बेडकरः महोदय, मैं ज्यादा समय नहीं लूँगा।

देशी रियासतों के पूर्व शासकों को कुछ विशेषाधिकार देने के लिए सरकार की आलोचना करने की उत्सुकता में मेरे मित्र श्री सरवटे ने कहा था कि वे यह नहीं समझ पाए हैं कि धारा 86 की उप-धारा (2) को भारतीय राजकुमारों पर लागू क्यों नही किया गया है। मुझे विश्वास है कि मेरे मित्र श्री सरवटे यह मानेंगे कि इसे लागू न करके हमने सबसे बुद्धिमत्तापूर्ण कार्य किया है क्योंंक यदि हमने इसे लागू कर लिया होता तो सरकार पर किसी राजकुमार के विरुद्ध किसी वाद की सम्मति देने पर पाबंदी लग जाती जब तक कि उप-धारा (2) में उल्लिखित चारों शर्तें पूरी नहीं होतीं। धारा 86 की उप-धारा (2) में दिए गए खंड (क), (ख), (ग) तथा (घ) वास्तव में अन्तरराष्ट्रीय कानून के नियम हैं। उनके बारे में कोई विवाद नहीं हो सकता और हम नहीं चाहते कि भारतीय राजकुमारों को अन्य विदेशी राज्यों के शासकों, राजदूतों या राज्य प्रमुखों के समतुल्य माना जाए। अतः हमने जो उन्मुक्ति प्रदान की है, वह बहुत ही लघु आयामी है। यदि उप-धारा (2) लागू कर दी गई होती तो स्थिति बदतर हो जाती।

अतः मैं नहीं समझता कि इस विधेयक पर कोई गंभीर आपत्ति की जा सकती है।

माननीय उपाध्यक्षः प्रश्न हैः

फ्कि सिविल प्रक्रिया संहित, 1908 का संशोधन वाले करने के लिए विधयेक पर विचार किया जाए।य्

प्रस्ताव अंगीकार किया गया।

माननीय उपाध्यक्षः सदन की बैठक अपरा“न 2.35 बजे तक स्थगित की जाती है।

तब मध्या“न भोजन के लिए सदन की बैठक अपरा“न 2.35 तक के लिए स्थगित हो गई।

मध्या“न भोजन के बाद सदन की बैठक अपरा“न 2.35 पर फिर आरंभ हुई।