28. भाग-ख राज्य (विधियाँ) विधेयक - Page 252

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ऽभाग-ख राज्य (विधियाँ) विधेयक

विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर)ः महोदय, मैं भाग-ख राज्यों पर कुछ कानूनों का विस्तार करने के लिए एक विधेयक रखना चाहता हूँ।

अध्यक्षः प्रश्न हैः

फ्कि ‘भाग-ख राज्यों पर कुछ कानूनों’ का विस्तार करने के लिए विधेयक रखने की अनुमति प्रदान की जाए।य्

प्रस्ताव अंगीकार किया गया।

डॉ. अम्बेडकरः महोदय, मैं विधेयक को पुरःस्थापित करता हूँ।

ऽऽभाग-ख राज्य (विधि) विधेयक

विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर)ः मैं प्रस्ताव की अनुमति चाहता हूँः

फ्कि भाग-ख राज्यों पर कुछ कानूनों का विस्तार करने के विधेयक पर विचार किया जाए।य्

यह विधेयक बहुत ही साधारण विधयेक है.........

एक माननीय सदस्यः जैसे अन्य सभी विधेयक हैं।

डॉ. अम्बेडकरः अन्य से कहीं ज्यादा साधारण। इस विधेयक का उद्देश्य यह है कि केन्द्रीय विधायिका द्वारा पारित किए गए ऐसे अधिनियम हैं जो केन्द्रीय सरकार द्व ारा पूर्व में प्रयोग किए गए अधिकार के कारण केवल भाग-क राज्यों पर लागू होते थे। भाग-ख राज्यों (पूर्ववर्ती देशी रियासतों) जो प्रभुसत्तासम्पन्न एवं स्वतन्त्र थे, के अपने-अपने कानून थे जिसकी तुलना सूची I तथा III के अंतर्गत केन्द्रीय विधायिका द्व ारा पारित कानूनों से की जा सकती है। जहां तक सूची I तथा III का सवाल है, अब इस संसद को भाग-ख राज्यों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों पर अधिकार प्राप्त हो गया है। सूची I तथा III के क्षेत्र पर लागू होने वाले केन्द्रीय विधायिका द्वारा पारित अनेक विधेयक पहले से ही मौजूद हैं, जो अपनी प्रादेशिक सीमा के कारण भाग-ख राज्यों पर लागू नहीं होते थे। यह विधेयक इसी उद्देश्य के लिए लाया गया है।

माननीय सदस्य देखेंगे कि इस विधेयक के साथ एक अनुसूची जुड़ी हुई है जिसमें

ऽसं. वा., खंड 6, भाग II, 20 नवंबर, 1950, पृष्ठ 183

ऽसं. वा., खंड 8, भाग II, 9 फरवरी, 1950, पृष्ठ 9665-66