28. भाग-ख राज्य (विधियाँ) विधेयक - Page 262

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नाम तथा अधिनियम सूत्र भी विधेयक में जोड़े गए।

डॉ. अम्बेडकरः मैं प्रस्ताव रखने की अनुमति चाहता हूँः

‘कि यथा संशोधित विधेयक पारित किया जाए।’

माननीय अध्यक्षः प्रस्ताव रखा गयाः

‘कि यथा संशोधित विधेयक पारित किया जाए।’

कैम्पटन ए.पी. सिंह (विन्ध्य प्रदेश)ः महोदय, मैं आपका ध्यान एक मुद्दे की ओर आकर्षित करना चाहूँगा। उद्देश्यों एवं कारणों के कथन में निर्धारित किया गया है कि ‘प्रशासन में सुधार लाने के प्रयोजन से’ और मैं इसका प्रतिरोध करता हूँ_ यद्यपि यह इसका हिस्सा नहीं है और इस प्रकार इस संबंध में कोई संशोधन नहीं रखा जा सकता।

माननीय अध्यक्षः ऑर्डर, ऑर्डर। माननीय सदस्य को बहुत देर हो गई है। मैं उन्हें सूचित कर दूँ, हालाँकि, इस बिन्दु पर सदन के दूसरे सदस्य द्वारा पहले ही विरोध जताया जा चुका था।

डॉ. अम्बेडकरः महोदय, मैं क्षमा चाहूँगा।

माननीय अध्यक्षः प्रश्न हैः

‘कि यथा संशोधित विधेयक पारित किया जाए।’

प्रस्ताव अंगीकार किया गया।

निवारक निरोध (संशोधन) विधेयक

ऽगृह मंत्री (राजगोपालाचारी)ः ............मैं यहां जल्दबाजी में आ रहा था क्योंकि मैंने सुना कि डॉ. अम्बेडकर ने इस सदन में दो भारी-भरकम विधेयकों को पारित करा लिया चूंकि कल शाम मुझे यह बिल्कुल आशा नहीं थी। मुझे लगता है कि लोग मुझे डॉ. अम्बेडकर की तुलना में ज्यादा बुरा मानते हैं।

विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर)ः मैं हरिजन हूँ। आप हरिजन नहीं हैं।

पटल पर अनुकूलन आदेश रखते हुए।

ऽऽमानीय उपाध्यक्षः डॉ. अम्बेडकर।

विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर)ः उपाध्यक्ष, महोदय...........।

ऽसं. वा., खंड 8, भाग II, 9 फरवरी, 1951, पृष्ठ 2679

ऽऽसं. वा., खंड 10, भाग II, 12 अप्रैल, 1951, पृष्ठ 6659