28. भाग-ख राज्य (विधियाँ) विधेयक - Page 263

248 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री श्यामानन्द ने सहाय (बिहार)ः महोदय, इसके पहले कि विधि मंत्री शुरूआत करें क्या मैं निवेदन कर सकता हूँ? अब हमारे पास संसद द्वारा 16 तारीख तक निपटाए जाने वाले कार्य की सूचना है। लेकिन अभी तक हमें यह पता नहीं है कि इस महीने की 17 तारीख और.........को कौन से विधेयकों या अन्य विधायी उपायों या अन्य कार्य लिए जाएंगे।

श्री सिधवा (मध्य प्रदेश) ः 19 तारीख तक की कार्यसूची है।

श्री श्यामानन्दन सहायः किन्तु इसमें केवल यह कहा गया है कि ये कार्य सरकारी होंगे या गैर-सरकारी।

श्री सिधवाः नहीं। वे सभी सरकारी विधेयक हैं। हमें ये आज ही मिले हैं।

डॉ. अम्बेडकरः उपाध्यक्ष महोदय, कल मेरे माननीय मित्र श्री हुसैन इमाम ने मेरे एक उत्तर के संबंध में प्रश्न उठाया था, यह उत्तर मैंने पंडित भार्गव द्वारा राष्ट्रपति द्वारा जारी अनुकूलन आदेश के संबंध में उठाए गए एक प्रश्न के संबंध में दिया था। दुर्भाग्यवश मैं सदन में मौजूद नहीं था। काश। उन्होंने मुझे इस आशय की पूर्व सूचना दी होती कि ये मामला उठाने जा रहे हैं। मैं निश्चित तौर पर उन्हें उत्तर देने के लिए सदन में मौजूद रहता। कल शाम सदन की कार्यवाही के कुछ अंश मुझे दिए गए और मैंने देखा कि उन्होंने दो प्रश्न उठाए हैं। एक प्रश्न जो उन्होंने उठाया था वह यह है कि उन्हें अनुकूलन आदेश की प्रति नहीं मिल सकी यद्यपि उन्होंने इसे प्राप्त करने का प्रयत्न किया था। इस मुद्दे पर जो तथ्य मुझे मिल पाए हैं, वे इस प्रकार हैं। यह अनुकूलन आदेश राजपत्र असाधारण में दिनांक 4 को तत्काल छपे थे। मैंने अपना उत्तर 7 तारीख को दिया था। इस अनुकूलन आदेश, या यों कहें, इस राजपत्र की प्रतियाँ संविधान शाखा में 10 तारीख को प्राप्त हुईं। यही वह तारीख थी जब उन्होंने संविधान शाखा को टेलीफोन पर संदेश दिया था, और यह पूछा था कि अनुकूलन आदेश की प्रतियों का क्या हुआ। मुझे सूचना मिली है कि जिस अधीक्षक से उन्होंने इस विषय में सम्पर्क किया था, उस अधीक्षक ने उन्हें बताया था कि राजपत्र असाधारण की प्रतियाँ उन्हें अभी-अभी प्राप्त हुई हैं और वे इस बात की जाँच कर रहे हैं कि क्या कोई लिपिकीय या मुद्रण गलतियाँ तो नहीं हैं। मुझे बताया गया कि मेरे माननीय मित्र ने एक प्रति के लिए विशेषतौर पर बात नहीं की। मुझे नहीं पता, वे इसकी पुष्टि करने अथवा न करने की बेहतर स्थिति में हैं।

श्री हुसैन इनाम (बिहार)ः मैंने सूचना कार्यालय तथा पुस्तकालय में मांगी थी।

डॉ. अम्बेडकरः मैं बता रहा हूँ कि अधीक्षक की शाखा में क्या हुआ। ऐसे होने के कारण माननीय सदस्य को संविधान शाखा द्वारा सीधे तौर पर कोई प्रति नहीं दी गई। स्पष्ट है कि यदि 10 तारीख को अधीक्षक को इसकी प्रतियां मिली थीं तो भी उनके लिए इन्हें सूचना कार्यालय में सदस्यों के बीच वितरण हेतु भेजना संभव नहीं था। पहली