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शिकायत के बारे में यह स्थिति है। मुझे भेजे गए कार्यवाही सार से मुझे ज्ञात हुआ है कि माननीय सदस्य ने विशेषाधिकार का भी प्रश्न उठाया था। मैं जो कुछ भी उन्हें समझा हूँ, वह यह कहना चाहते थे कि जैसे ही राष्ट्रपति द्वारा अनुकूलन आदेश किया जाए, इसे सदन के पटल पर रखा जाना चाहिए। महोदय, जहाँ तक इस प्रश्न का सवाल है, मेरा निवेदन यह है। इस सदन को जो भी विशेषाधिकार प्राप्त हैं, उनका विनियमन संविधान के अनुच्छेद 105 द्वारा होता है जो कहता है कि सदन को वे सभी विशेषाधिकार प्राप्त होंगे जो विशेषाधिकार हाउस ऑफ कॉमन्स के पास हैं। इसके लिए हमें यह जाँच करनी होगी कि कौन-सी स्थिति में जब कागज सदन के पटल पर रखा जाए, विशेषाधिकार का मामला होगा और ऐसा करना कब विशेषाधिकार का मामला नहीं होगा मईऽ का संदर्भ देते समय एक बात तो स्पष्ट है............
माननीय उपाध्यक्षः मुझे खेद है कि मुझे माननीय मंत्री को टोकना पड़ रहा है। जहां तक विशेषाधिकार का प्रश्न है, सबसे पहले तो इसे अध्यक्ष देखते हैं, नियमों और विनियमों को पढ़ते-लिखते हैं और उसके बाद सदन का मत सुनिश्चित करते हैं। यदि वह इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं ‘कि इसमें विशेषाधिकार का मामला बनता है तब वह इसे विशेषाधिकार समिति के पास भेजते हैं। मैं नहीं समझता कि माननीय सदस्य ने विशेषाधिकार का प्रश्न गंभीरतापूर्वक उठाया था। प्रश्न यह था कि अनुकूलन आदेश की प्रति उपलब्ध कराई जानी चाहिए। वे सूचना कार्यालय तथा पुस्तकालय भी गए थे। उन्होंने कहा है कि अनुकूलन आदेश 4 अप्रैल को जारी किया गया था और इस प्रकार सामान्यतया एक या दो दिन मे पुस्तकालय में रखे जाने की उम्मीद कर रहे थे। अब मामला विधि मंत्री ने स्पष्ट कर दिया है। हमें विशेषाधिकार के प्रश्न पर और गहराई में जाने की आवश्यकता नहीं है।
डॉ. अम्बेडकरः यदि आपका विनिर्णय यही है तो मैं इस मामले को आगे नहीं बढ़ाऊँगा। किंतु मैं केवल एक मुद्दा रखना चाहता हूँ जो मैं समझता हूँ, व्यापक हित का मुद्दा है और जिसे सदन को जानना चाहिए। विशेषाधिकार का मामला तभी उठ सकता है जब संविधि सरकार के लिए यह बाध्यकारी बना दे कि कागज-पत्र (पेपर) सदन के पटल पर रखा जाना चाहिए। अब जहां तक अनुकूलन आदेश का सवाल है, इस मामले में ऐसी कोई बाध्यता नहीं है। मैं चाहूंगा कि माननीय सदस्य अनुच्छेद 372 से तुलना करें जो अनुकूलन से संबंधित है, अनुच्छेद 392 से तुलना करें जो इस आदेश से संबंधित है जो राष्ट्रपति ने परिवर्तन अवधि के दौरान संविधान की कठिनाइयों को दूर करने के लिए किया था। पता चलेगा कि जहां तक अनुच्छेद 392 का सवाल है, उसमें एक विशिष्ट उप-खंड है जो कहता है कि कठिनाइयों को दूर करने के लिए राष्ट्रपति द्वारा किए गए
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