28. भाग-ख राज्य (विधियाँ) विधेयक - Page 268

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हूँ जो राय मेरी बनी है। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है। जहां तक मैं समझता हूँ सुरक्षा पोत (जहाज) की यांत्रिक संरचना पर निर्भर करती है न कि इसकी आकृति या आकार की संरचना पर। अतः मेरी समझ से इन दोनों के बीच अन्तर स्थापित करने की आवश्यकता हैµसंरचनात्मक खराबी जिसका कि जहाज से कोई संबंध नहीं होता एवं यांत्रिक खराबी जिसका जहाज की सुरक्षा से कुछ, वास्तव में बहुत कुछ, संबंध होता है। इस विधेयक का उद्देश्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है और इस प्रकार बल, मुख्य तौर पर, जहाज के यांत्रिक पक्ष पर दिया जाना चाहिए न कि संरचनात्मक पक्ष पर। उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति के पास एक एबलॉन्ग जहाज हो सकता है, ऐसा जहाज हो सकता है जिसका तला अन्य जहाजों से भिन्न हो।

श्री सिधवाः यह तो एक खराबी है।

डॉ. अम्बेडकरः मैं यह जानना चाहता हूँ कि संरचनात्मक खराबी क्या होता है? कोई कह सकता है, ‘मेरे दृष्टिकोण से यह संरचनात्मक खराबी है। इसकी आकृति कुछ अन्य प्रकार की होनी चाहिए थी।’ दूसरा व्यक्ति कह सकता है ‘यह दूसरी आकृति का होना चाहिए था।’ मैं जो निवेदन करने का रहा हूँ वह यह है कि यह विधेयक यात्रियों की सुरक्षा की बात कर रहा है, तथा यात्रियों की सुरक्षा निश्चित तौर पर, मुख्य रूप से, मूलतः जहाज की यांत्रिकता पर निर्भर करती है, और इस प्रकार किसी पर्यवेक्षक द्वारा प्रमाण-पत्र दिए जाने के मामले में जो आवश्यक बात है, वह यह है कि उसे देखना चाहिए कि क्या कोई यांत्रिक गड़बड़ी तो नहीं है। यही मेरा निवेदन है।

श्री वेंकटारमनः क्या मैं विधि मंत्री से पूछ सकता हूँ......

डॉ. अम्बेडकरः इसमें विधि की कोई बात नहीं है। मैं केवल सदन के एक सदस्य के तौर पर बात कर रहा हूँ।

श्री हुसैन इमामः कभी-कभी संरचनात्मक गड़बड़ी यात्रियों की सुरक्षा को क्षति पहुँचा सकती है। उदाहरण के लिए, जहाज की रेलिंग इतनी नीची हो सकती है कि यात्री पानी में गिर जाएं। साथ ही यदि उसके दाँते ठीक प्रकार से ढके नहीं गए हैं तो यात्री उन पर गिर सकते हैं और मर सकते हैं। ठीक इसी प्रकार यदि इंजन कक्ष उपयुक्त ढंग से सुरक्षित नहीं है तो आपके साथ दुर्घटना हो सकती है। ‘संरचना’ शब्द का अर्थ यह नहीं है कि आकार तथा आकृति में कोई खराबी है अपितु उसको उसी प्रयोजन के लिए लिया जाना चाहिए जिसके लिए विधि मंत्री जोर डाल रहे हैं, अर्थात्, हमें यात्रियों की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए। हमें अपने प्राधिकरण पर विश्वास करना चाहिए कि वह संविधि का इस प्रकार निर्वचन करेंगे कि वह अप्रवृत्तशील न बन जाए। मेरे विचार से ‘संरचनात्मक’ बहुत ही आवश्यक है।