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न्यायालय में विधि व्यवसाय करने का वचन दिया हो (जो उसके अपने प्रांत का उच्च न्यायालय ही हो) तो वह विधि व्यवसाय नहीं करेगा, उस विधेयक में उपबंध के रहते हुए भी ये इस विधेयक के साधारण उपबंध हैं।
श्री सी. सुब्रमण्यम (मद्रास)ः पहले अपवाद का क्या कारण है?
डॉ. अम्बेडकरः कारण यह है। विधिज्ञ परिषद अधिनियम के अधीन एक विशेष उपबंध है। मेरा मानना है कि अब ऐसे केवल तीन न्यायालय हैं जिन्हें मूल अधिकारिता मिली है। अन्य सभी उच्च न्यायालय केवल अपीली उच्च न्यायालय हैं और उनकी कोई मूल अधिकारिता नहीं है किन्तु उन्हें मूल पक्ष के व्यक्तियों के नामांकन के लिए नियम बनाने के विशेष अधिकार प्रदान किए गए हैं। क्योंकि विधिज्ञ परिषद अधिनियम को संशोधित करने का कोई प्रस्ताव नहीं किया गया, अतः इस उपबंध को अक्षुण्ण रखना वांछनीय समझा गया। इससे अधिक कठिनाई नहीं होगी क्योंकि जब उच्चतम न्यायालय द्वारा मामला उच्च न्यायालय को वापस भेजा जाता है तो इसकी पूरी संभावना है और ज्यादातर मामलों में ऐसा ही होता है कि इस मामले की पैरवी उच्च न्यायालय के अपीली पक्ष द्वारा की जाय।
श्री एस.एन. सिन्हा (बिहार)ः कुछ उच्च न्यायालयों में प्रोबेट तथा कंपनी कानून जैसे मामलों में मूल अधिकारिता है। इन मामलों में भी क्या आप प्रतिशोध करने जा रहे हैं?
डॉ. अम्बेडकरः स्थानीय वकीलों के लिए भी कुछ छोड़ दिया जाए।
अध्यक्षः प्रस्ताव रखा गयाः
फ्कि उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ताओं को किसी उच्च न्यायालय में साधिकार वकालत करने को प्राधिकृत करने के लिए विधेयक पर विचार किया जाए।य्
श्री वेंकटरमन (मद्रास)ः यदि यह विधेयक देश के अधिवक्ताओं को एकीकृत करता है तो इसका स्वागत है। न केवल उच्चतम न्यायालय की स्थापना के बाद बल्कि उससे पहले भी, परिसंघीय न्यायालय की स्थापना के ठीक बाद मद्रास में साल-दर-साल आयोजित होने वाले वकीलों के सम्मेलन में यह संकल्प पारित करके सुझाव दिया गया था कि भारत में अधिवक्ता एकीकृत होने चाहिएं और अखिल भारतीय बार कौंसिल होनी चाहिए और इन सभी वकीलों का नामांकन व इन पर अनुशासनिक अधिकार केवल एक केन्द्रीय नियंत्रण अर्थात्, अखिल भारतीय बार कौंसिल के अंतर्गत लाना चाहिए। यद्यपि इस विधेयक में ऐसा उपबंध नहीं है फिर भी यह बिल इस दिशा में एक पहल है। इसके अनुसार ऐसे अधिवक्ता, जो उच्चतम न्यायालय में नामांकित हैं, उच्च न्यायालयों में वकालत करने के हकदार होंगे चाहे उन्होंने उन उच्च न्यायालयों में स्वयं अपने लिए स्थापित किया था। उन्होंने कहा था कि उनकी यह मंशा है कि उच्चतम न्यायालय के