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इसके अलावा, मैं माननीय मंत्री जी का ध्यान इस बात की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ कि खंड 2 के परंतुक के भाग (क) के लोप से उनका कोई नुकसान नहीं होगा। मैं मानता हूँ कि बम्बई में भी उन्होंने मूल पक्ष के अधिवक्ताओं और अपीली पक्ष के अधिवक्ताओं के बीच के अंतर को समाप्त किया है।
डॉ. अम्बेडकरः वे एक निश्चित अवधि के बाद उन्हें एक पक्ष से दूसरे पक्ष की ओर जाने की अनुमति देते हैं।
श्री वेंकटरमनः अपीली पक्ष के विधि व्यवसायियों के लिए अब तक प्रचलित परम्परा कि वे मूल पक्ष के मामलों (केसों) की पैरवी करने हकदार नहीं हैं, समाप्त हो चुकी है और आज अपीली पक्ष के विधि व्यवसायी, मूल पक्ष में भी हाजिर हो सकते हैं, जैसा कि मद्रास उच्च न्यायालय में हो रहा है। जहां तक मद्रास उच्च न्यायालय का संबंध है, अपीली पक्ष और मूल पक्ष के विधि व्यवसायियों के बीच कोई अंतर नहीं है। मद्रास उच्च न्यायालय का अधिवक्ता अपीली और मूल दोनों पक्षों में किसी भी मामले (केस) में हाजिर हो सकता है.......
डॉ. अम्बेडकरः वे तो नंगे पांव भी जाते हैं।
श्री वेंकटरमनः वहाँ प्रथाएं ही प्रथाएं हैं। मैं यहाँ कई ऐसे लोगों को देख सकता हूँ जो मेरे देशवासियों को विस्मयकारी प्रतीत होंगे।
हम यहां चप्पल-जूतों के बारे में बात करने नहीं आए हैं, बल्कि विधि व्यवसायियों के कानूनी अधिकारों के बारे में बात करने आए हैं। बम्बई उच्च न्यायालय के विधि व्यवसायी पर भी समान नियम लागू होते हैं। बम्बई और मद्रास उच्च न्यायालय के बीच अंतर यह हैµजबकि मद्रास उच्च न्यायालय में कोई दोहरी व्यवस्था नहीं है, मूल पक्ष में किसी मामले (केस) की पैरवी करने के लिए अधिवक्ता को किसी न्यायवादी अथवा सॉलिसिटर के निदेशों की आवश्यकता नहीं होती, अपीली पक्ष में उनकी यह व्यवस्था है जिसमें मूल पक्ष में विधि व्यवसायी को सॉलिसिटर अथवा न्यायवादी द्वारा निवेश दिए जाने की आवश्यकता है। मैं समझ सकता हूँ कि सॉलिसिटर अथवा न्यायवादी द्वारा निदेश दिए जाने की आवश्यकता है। मैं समझ सकता हूँ कि सॉलिसिटर और न्यायवादी उनके अधिकार उनके लिए संरक्षित करने का अनुरोध क्यों कर रहे हैं। जहां तक उनके अधिकारों का संबंध है उन्हें संरक्षित किया जाना चाहिए। कोई भी विधि व्यवसायी किसी मामले (केस) की पैरवी कर सकता है किन्तु उसे न्यायवादी अथवा सॉलिसिटर द्वारा निदेश दिए जाने चाहिएं। यदि यही उद्देश्य है तो इसे फ्अभिवचन करनाय् शब्दों को हटाकर संरक्षित अथवा प्राप्त किया जा सकता है। उच्चतम न्यायालय के किसी विधि व्यवसायी को बंबई उच्च न्यायालय अथवा मूल पक्ष में किसी अन्य उच्च न्यायालय के समक्ष जाने से रोका जा सकता है। इस परंतुक के भाग (क) के साथ लागू इस