260 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
विधेयक के कारण उच्चतम न्यायालय के विधि व्यवसायी के लिए मूल पक्ष की ओर से मामले (केस) की पैरवी करना असंभव होगा, इस तथ्य के बावजूद कि उसने उस मामले विशेष में स्वयं उच्चतम न्यायालय के समक्ष पैरवी की थी और इस मामले को उस न्यायालय के मूल पक्ष के पास भेजा गया था।
एक माननीय सदस्यः इन्हें अपनी चर्चा कल जारी रखने दें। पाँच बज गए हैं।
तत्पश्चात् सदन को शुक्रवार 20 अप्रैल, 1951 के पौने ग्याहर बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
ऽउच्चतम न्यायालय अधिवक्ता
(उच्च न्यायालयों में वकालत) विधेयक-जारी
माननीय अध्यक्षः अब हम विधायी कार्य कर आगे कार्रवाई करेंगे अर्थात् डॉ. अम्बेडकर द्वारा कल रखे गए प्रस्ताव परµ
फ्कि इस विधेयक पर जो उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ताओं को प्राधिकृत करता है कि वे साधिकार किसी उच्च न्यायालय के मामले (केस) की पैरवी कर सकता है, विचार किया जाए।य्
श्री वेंकटरमन (मद्रास)ः कल मैं निवेदन कर रहा था कि यह विधेयक एक स्वागत योग्य उपाय है, किन्तु यह परंतुक इस विधेयक के मुख्य उद्देयय के विरुद्ध है। मैं यह दिखाने की कोशिश कर रहा था कि कैसे.........
विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर)ः कार्यवाही को संक्षिप्त करने के लिए मैं कह सकता हूं कि मैं संशोधन को स्वीकार करने के लिए तैयार हूँ जो निस्संदेह अन्य बातें समझने के अधीन होगा।
श्री वेंकटरमनः इस सुझाव को स्वीकार करने के लिए मैं माननीय विधि मंत्री के प्रति आभार व्यक्त करता हूँ और इसीलिए मैं इस परंतुक में खंड (क) को छोड़कर इस विधेयक का तहे दिल से समर्थन करता हूँ।
पंडित ठाकुर दास भार्गव (पंजाब)ः मैं इस दिल का समर्थन करता हूँ.......
परंतुक (ख) के संबंध में मैं अपना मत रखना चाहूँगा। परंतुक (ख) का आशय है किः
(ख) फ्ऐसे उच्च न्यायालय में वकालत करना जिसमें कि वह किसी समय न्यायाधीश रहा हो, यदि उसने न्यायाधीश के रूप में सेवानिवृत होने के बाद उस न्यायालय में वकालत न करने का वचन दिया हो।य्
ऽसं. वा., खंड 10, भाग II, 20 अप्रैल, 1951, पृष्ठ 7129-34