261
मैं निवेदन करता हूँ कि उच्च न्यायालय में पूर्व न्यायधीश रह चुके किसी व्यक्ति द्वारा उस उच्च न्यायालय में वकालत करने पर प्रतिबंध किसी शपथ या वचन पर आधारित नहीं होना चाहिए। सार्वजनिक नीति में अपेक्षित होता है कि किसी उच्च न्यायालय के किसी पूर्व न्यायाधीश को उसी न्यायालय में वकालत नहीं करनी चाहिए, किन्तु यह ‘परंतुक’ दिए गए वचन के आधार पर प्रतिबंध लगाता है। ऐसे कई उच्च न्यायालय हैं जहां कोई भी वचन नहीं लिया जाता है। अतः यदि पूर्व न्यायधीश को किसी विशेष न्यायालय में वकालत करने से रोका जाना है तो यह दिए गए वचन से स्वतंत्र होना चाहिए। संविधान में एक अनुच्छेद है जिसके अनुसार सभी पूर्व न्यायधीशों पर न केवल उस न्यायालय में जहां वे न्यायधीश थे, बल्कि सभी अन्य न्यायालयों में_ विधि व्यवसाय करने पर प्रतिबंध होगा। मैं निवेदन करता हूँ कि परंतुक (ख) इसके विरुद्ध है। इस परंतुक के परिण् ामस्वरूप कोई पूर्व न्यायाधीश यदि उसने वचन नहीं दिया हो तो वह उच्च न्यायालय में वकालत कर सकता है। हालांकि संविधान के अनुसार सभी पूर्व न्यायाधीशों को किसी उच्च न्यायालय में वकालत करने पर प्रतिबंध है।
डॉ. टेक चंद (पंजाब)ः संविधान लागू होने के बाद नियुक्त न्यायाधीश।
डॉ. अम्बेडकरः हाँ, यही नियम है।
ऽमाननीय अध्यक्षः संशोधनों का प्रश्न बाद में आएगा। संभवतः माननीय विधि मंत्री के उत्तर के बाद माननीय सदस्यों की अनेक शंकाओं का समाधान हो सकता है। उसके बाद हम संशोधनों पर विचार कर सकते हैं।
डॉ. अम्बेडकरः माननीय सदस्यों द्वारा दिए गए भाषणों के दौरान उठाए गए अधिकतर प्रश्नों का इस विधेयक के गुणावगुणों से कुछ लेना-देना नहीं है। ये प्रश्न ऐसे विषय से जुड़े हुए हैं जो अधिवक्ताओं के एकीकरण से अधिक संबंधित है। इस विधेयक का उद्देश्य बहुत सीमित है और ऐसी कठिनाइयों को दूर करना है जो कि उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय द्वारा अपनी स्वतंत्र अधिकारिता में अधिवक्ताओं के नामांकन के कारण उत्पन्न होती हैं। मुवक्विलों को इसलिए कष्ट उठाना पड़ा है क्योंकि जिन वकीलों की वे उच्चतम न्यायालय में सेवाएं लेते हैं उन्हें उच्च न्यायालय में पैरवी करने की अनुमति नहीं दी जाती है, जबकि मामला (केस) उच्चतम न्यायालय द्वारा उसी उच्च न्यायालय में भेजा जाता है। यह इस विधेयक का सीमित उद्देश्य है। किन्तु इस सामान्य आकांक्षा के मद्देनजर कि इस सीमित उद्देश्य की प्राप्ति के समय भी बार के एकीकरण की दिशा में कुछ किया जा सकता है, मैंने दो प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की है जो वास्तव में विधेयक के प्रत्यक्ष उद्देश्य से परे हैं।
इनमें से एक है उच्चतम न्यायालय में नामांकित सभी वकीलों को अनुमति देना कि
ऽसं. वा., खंड 10, भाग II, 20 अप्रैल, 1951, पृष्ठ 7140-42