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विधि व्यवसाय करने का उनका अधिकार स्थायी है। उनके प्रमाण-पत्र वार्षिक प्रमाण-पत्र होते हैं और जब ये प्रमाण-पत्र समाप्त हो जाते हैं तब वे विधि व्यवसायी नहीं रहते। मेरे ख्याल में ये सभी चीजें इस विधेयक के उद्देश्य के लिए अप्रसांगिक हैं तथा जब मामले को न्यायालय में उठाया जाएगा तो निस्संदेह ये अपना ध्यान स्वयं रखेंगे। मैं नहीं समझता कि कोई और मुद्दे पर स्पष्टीकरण दिए जाने की आवश्यकता है।
माननीय अध्यक्षः प्रश्न है किः
फ्कि उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ताओं को किसी भी उच्च न्यायालय में साधिकार वकालत करने को प्राधिकृत करने के लिए विधेयक पर विचार किया जाए।य्
प्रस्ताव अंगीकार किया गया।
खंड 2 (किसी भी उच्च न्यायालय में वकालत करने का अधिकार)
माननीय अध्यक्षः क्या मैं जान सकता हूँ कि क्या माननीय मंत्री इन संशोधनों में से किसी संशोधन को स्वीकार कर रहे हैं?
डॉ. अम्बेडकरः इस परंतुक में भाग (क) को हटाने संबंधी श्री अहमद मीरान के संशोधन सं. 7 के अलावा मैं इनमें से किसी भी संशोधन को स्वीकार नहीं कर रहा हूँ। किन्तु निस्संदेह मेरे मित्र यह मानेंगे कि थोड़े-बहुत पुनर्प्रारूपण की आवश्यकता होगी क्योंकि यदि (क) जाता है तो (ख) को नया संख्यांक देना पड़ेगा।
ऽमाननीय अध्यक्षः मुझे लगता है कि माननीय मंत्री इस प्रश्न के इस भाग का उत्तर देना चाहते हैं।
डॉ. अम्बेडकरः मरे माननीय मित्र ने वस्तुतः स्थिति को स्पष्ट कर दिया है और मुझे नहीं लगता मैं इस विषय में और कुछ कहना चाहूँगा। किन्तु मैंने इसे उनकी तुलना में और अधिक साधारण बना दिया है। स्थिति यह है कि संविधान का अनुच्छेद 220 उन भावी न्यायाधीशों पर लागू होता है जिन्होंने उच्च न्यायालय में न्यायाधीश का पद संविधान के आरंभ होने के बाद ग्रहण किया है। उच्चतम न्यायालय अथवा किसी अन्य न्यायालय के समक्ष चाहे वह उच्च न्यायालय हो अथवा अधीनस्थ न्यायालय उनका विधि व्यवसाय करने का प्रश्न नहीं उठ सकता।
डॉ. टेक चंदः भारत में।
डॉ अम्बेडकरः हाँ भारत में। क्योंकि अनुच्छेद 220 का विशेष रूप से ऐसा कहना है। हम उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीशों के संबंध में चर्चा कर रहे हैं जो संविधान के बनने से पहले ही न्यायाधीश थे, जैसा कि मेरे मित्र ने इंगित किया है। संविधान के
ऽसं. वा., खंड 10, भाग II, 20 अप्रैल, 1951, पृष्ठ 7147-49