29. उच्चतम न्यायालय अधिवक्ता (उच्च न्यायालय में वकालत) विधेयक - Page 279

264 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

बनने से पहले के न्यायाधीश, बहस के लिए दो वर्गों में विभाजित हो सकते हैंः वे जिन्होंने वचन दिया है कि वे अपने न्यायालय में विधि व्यवसाय नहीं करेंगे, दूसरे वे जिन्होंने वचन नहीं दिया है। इस परंतुक का यह प्रयास है कि यह उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीशों पर, जिन्होंने पहले ही वचन दे दिया था, लागू हो। यह साधारण स्थिति है। निस्संदेह, इस सदन के लिए यह पूरी तरह संभव है कि वह इस परंतुक के क्षेत्र का विस्तार करे एवं कहे कि उच्च न्यायालय के किसी भी न्यायाधीश को भले ही उसने वचन भी नहीं दिया हो, वकालत करने की अनुमति नहीं दी जाएगी_ यह विधायिका की शक्ति के अन्तर्गत है। किंतु असल मुद्दा यह है कि ऐसे लोग, जिन्होंने इस निश्चित शर्त के आधार पर पद स्वीकार किए हैं कि उन्हें सेवानिवृत होने के बाद विधि व्यवसाय करने की अनुमति दी जाएगी और अब हमारे लिए कानून के विधान का निर्माण करना और यह कहना सही नहीं होगा। भले ही उन्होंने वचन नहीं दिया है, फिर भी यह नया नियम कि वे विधि व्यवसाय नहीं करेंगे_ उन पर लागू होगा। इसी कारण उप-खंड (ख) इतना प्रतिबंधित है और केवल उन्हीं पर लागू होता है जिन्होंने वचन दिया है। इसलिए इससे किसी प्रकार का अन्याय नहीं होगा।

श्री नज़ीरुद्दीन अहमदः क्या मैं बता सकता हूं कि परंतुक (ख) उन न्यायाधीशों तक सीमित नहीं है जो संविधान के निर्माण के पहले न्यायाधीश थे? इस परंतुक के अनुसार फ्उस उच्च न्यायालय में विधि व्यवसाय करना जिसमें किसी समय वे न्यायाधीश थे.........., न कि संविधान के पहले से नहीं।य्

डॉ. अम्बेडकरः मुद्दा यह है कि, दूसरा प्रश्न नहीं उठता, क्योंकि संविधान में इसकी स्पष्ट रूप से व्याख्या की गई है।

श्री नज़ीरुद्दीन अहमदः मैंने यही कहा है।

डॉ. अम्बेडकरः आप कोई ऐसा कार्य क्यों करना चाहते हैं जो संविधान कर चुका है। ऐसे वचन का प्रश्न नहीं उठता। उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय दोनों के न्यायाधीशों की स्थिति में संविधान द्वारा इस मामले को अंतिम रूप से निपटा दिया गया है। हम एक ऐसे मामले पर विचार कर रहे हैं जो कानून में नहीं आता और जो केवल वायदों, प्रथाओं और वचनों से विनियमित होता है।

माननीय अध्यक्षः क्या माननीय मंत्री एक और मुद्दा स्पष्ट करेंगे? क्या ऐसे न्यायाधीशों, जो संविधान पारित होने के बाद विधि व्यवसाय करने के अपने अधिकार को प्राप्त करना चाहते थे, को त्यागपत्र देने तथा न्यायाधीश नहीं रहने का विकल्प दिया गया है।

डॉ. अम्बेडकरः वे स्थिति से परिचित थे और जब संविधान विचारधीन था तो उनमें से कुछ नेµमैं ऐसे दो या तीन सज्जनों को जानता हूँµत्यागपत्र दे दिया था क्योंकि उन्होंने उस स्थिति को स्वीकार नहीं किया था। यह सभी जानते हैं।