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श्री जे.आर. कपूरः मैं सदन की जानकारी के लिये बताना चाहूँगा कि न्यायाधीशों को त्याग-पत्र देने का विकल्प दिया गया था और कुछ न्यायाधीशों ने त्याग-पत्र दिए भी हैं। ऐसा ही एक मामला इलाहाबाद का भी था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश ने केवल इस नये अनुच्छेद के कारण त्याग-पत्र दे दिया।
माननीय अध्यक्षः ऐसा ही एक मामला कलकत्ता उच्च न्यायालय में भी था।
डॉ. अम्बेडकरः सदन की जानकारी के लिये मैं यह उल्लेख करना चाहूँगा कि उच्च न्यायालय के प्रत्येक न्यायाधीश ने जो सेवानिवृत हो चुके हैं, आगे विधि व्यवसाय न करने के लिये वचन दिया है। यहां ऐसे केवल दो ही सज्जन हैं, सौभाग्य से जो जीवित हैं, और जिन्होंने ऐसा वचन नहीं दिया है (एक माननीय सदस्यः एक यहां मौजूद हैं) ऐसे में तथाकथित समस्या की गुंजाईश बहुत सीमित है।
माननीय अध्यक्षः श्रीमन, मीरान संशोधन रख सकते हैं।
डॉ. अम्बेडकरः वह पहले ही रखा जा चुका है।
श्री वेंकटरामनः मैं इस विषय पर केवल सामान्य चर्चा के दौरान ही बोला था।
माननीय अध्यक्षः मैं यह जानना चाहूँगा कि क्या माननीय सदस्य इस बात से सहमत हैं कि यह विधेयक पांच मिनट में पूरा कर दिया जाये।
अनेक माननीय सदस्यः जी हाँ।
श्री जे.आर. कपूरः जब खंड-1 रखा जाये तो मैं दो मिनट लेना चाहूँगा क्योंकि इस विषय पर मेरे गंभीर विचार हैं।
माननीय अध्यक्षः यह सदन अपरा“न 2.35 तक स्थगित रहेगा।
तत्पश्चात् सदन दोपहर के भोजन के लिए दो बजकर पैंतीस तक स्थगित हो गया।
सदन ने दोपहर के भोजन के बाद 2.35 बजे पुनः अपनी कार्यवाही आरंभ की।
(पंडित ठाकुर दास भार्गव पीठासीन)
ऽमाननीय अध्यक्षः और अब तक केवल दो संशोधन पारित हुए हैं अब मैं उन्हें मतदान के लिए रखूंगा।
श्री मीरानः सं. 7 को सं. 6 से पहले रखा जाये।
ऽसं. वा., खंड 10, भाग II, 20 अप्रैल, 1951, पृष्ठ 7150