32. जलियांवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक विधेयक - Page 292

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ऽजलियांवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक विधेयक

विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर)ः मैं प्रस्ताव पेश करने की अनुमति चाहता हूँः

फ्कि जलियांवाला बाग में 13 अप्रैल, 1919 को मारे गए, घायल हुए लोगों की याद को अमर बनाने के लिए एक राष्ट्रीय स्मारक का निर्माण तथा प्रबंधन करने का उपबंध करने के लिए विधेयक पर विचार किया जाए।य्

जलियांवाला बाग के नाम से घटी घटना से प्रत्येक भारतीय भली-भांति परिचित है तथा मैं नहीं समझता कि इसके बारे में कुछ और कहने की आवश्यकता है। इस विधेयक के उद्देश्य के लिए जो प्रासंगिक है वह यह है कि इस घटना के तुरंत बाद कुछ प्रसिद्ध भारतीयों ने उस दिन मारे गए तथा घायल हुए लोगों की याद को अमर बनाने का फैसला किया था।

डॉ. टेक चंद (पंजाब)ः पंडित मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में अमृतसर में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सत्र में यह फैसला किया गया था।

डॉ. अम्बेडकरः हाँ, और उन्होंने कुछ राशि भी इकट्ठी की थीµमैं समझता हूँः दस लाख।

डॉ. टेक चंदः हाँ, दस लाख।

डॉ. अम्बेडकरः जैसा कि इस अनुसूची में वर्णित है इन रुपयों से उन्होंने दो या तीन भूखंड भी खरीदे थे जो कि इस ट्रस्ट के भाग रूप में धारित हैं। पहले से ही ट्रस्ट तथा ट्रस्टी हैं परंतु वे अनौपचारिक प्रकृति के हैं। इस ट्रस्ट को कानूनी आधार देने का प्रस्ताव किया गया है तथा प्रस्ताव यह है कि ये ट्रस्टी तीन विभिन्न श्रेणियों में विभाजित होंगेः कुछ ट्रस्टी आजीवन ट्रस्टी होंगे, कुछ ट्रस्टी पदेन होंगे तथा अन्य तीन व्यक्ति केन्द्र सरकार द्वारा नामित किए जाएंगे। ये लोग इस अनुसूची के प्रथम भाग में वर्णित भूमि, सम्पत्ति तथा नकदी और चल सम्पत्ति को जो कि मेरी गणना के अनुसार लगभग 3,13,757-1-0 रुपये होती है, धारण करेंगे। इस ट्रस्ट का उद्देश्य इस स्मारक का रख-रखाव करना तथा यह देखना है कि इसका ध्यान अच्छी तरह से रखा जा रहा है।

सिर्फ एक ही बिन्दु है जिस पर विचार करने की आवश्यकता है और वह यह है कि इस विधेयक में वर्णित मूल ट्रस्टी स्वर्गीय सरदार वल्लभ भाई पटेल अब नहीं रहे तथा सदन को उनके स्थापनापन्न के बारे में विचार करना है। शेष विधेयक वैसा ही है जैसा कि मूल ट्रस्टियों द्वारा जो कि इन उद्देश्यों के लिए ट्रस्टी का कार्य कर रहे थे, प्रस्तावित किया गया था।

ऽसं. वा., खंड 10, भाग II, 20 अप्रैल, 1951, पृष्ठ 7179-812