32. जलियांवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक विधेयक - Page 293

278 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

माननीय अध्यक्षः प्रस्ताव पेश किया गयाः

फ्कि जलियांवाला बाग में 13 अप्रैल, 1919 को मारे गए या घायल हुए लोगों की याद को अमर बनाने के लिए एक राष्ट्रीय स्मारक का निर्माण तथा प्रबंधन करने का उपबंध करने के लिए विधेयक पर विचार किया जाए।य्

श्री कॉमथ (मध्य प्रदेश)ः यह उपयुक्त ही है कि इस प्रकार का विधेयक सदन के समक्ष पेश किया गया है। तीस साल पहले यह नरसंहार जलियांवाला बाग में हुआ था तथा हमारे देश के सैंकड़ों स्त्री-पुरुष या तो मारे गए थे.........

डॉ. टेक चंदः दो हजार-न कि सैंकड़ों।

श्री कॉमथः मारे गए थे?

डॉ. टेक चंदः हाँ, दो हजार मारे गए थे।

श्री कॉमथः ...........हजारों या तो मारे गए थे या घायल हो गए थे। कांग्रेस ने 1919 में एक संकल्प पास किया था जिसमें जमीन का अर्जित करके उस पर जलियांवाला बाग के शहीदों का स्मारक बनवाने का प्रस्ताव किया गया था। हमें विधि मंत्री ने यह नहीं बताया कि यह विधेयक किसने रखा था। इस उद्देश्य के लिए कुल कितनी राशि इक्ट्ठी की गई थी। उन्होंने कहा फ्लगभग दस लाखय् पर उनके पास राशि की सही जानकारी नहीं है.........।

डॉ. अम्बेडकरः मैंने कहा लगभग दस लाखµसही आँकड़ा मैं बाद में दे सकता हूं।

श्री कॉमथः ...........तथा उस राशि का कितना भाग उस भूमि को प्राप्त करने में खर्च किया गया था। जहां पर प्रस्तावित स्मारक बनाया जाना है। यह दुरुसत है कि सरकार को, स्वतंत्र भारत की पहली सरकार को बहुत वर्ष पहले कांग्रेस द्वारा पास किए गए संकल्प का ध्यान रखना तथा इसे कार्यरूप देना चाहिए। किन्तु, श्रीमन्, इसके साथ-साथ कुछ अन्य प्रश्न भी उठते हैं। जैसाकि मैंने पहले कहा है इस विधेयक का उद्देश्य जलियांवाला बाग के शहीदों की याद को अमर बनाना तथा दिसंबर, 1919 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संकल्प को लागू करना है। इससे हमारी राजनीति में गाँधीवादी काल की शुरूआत हुई थी तथा उस अवधि के दौरान कांग्रेस ने विभिन्न प्रकार के चंदे इक्ट्ठे किए थे। इसलिए विधि मंत्री द्वारा पेश किए गए इस विधेयक के संबंध में एक महत्वपूर्ण बिन्दु यह है कि कांग्रेस द्वारा किसी विशेष प्रयोजन कि लिए इक्ट्ठी की गई अन्य धनराशि को सरकार कहाँ तक ध्यान में रखेगी और उसका संज्ञान लेगी।