32. जलियांवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक विधेयक - Page 294

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श्री भारती (मद्रास)ः महोदय, व्यवस्था के प्रश्न, पर वह हमारे सम्मुख रखे विधेयक से कहाँ तक प्रासंगिक है। माननीय सदस्य ने कांग्रेस द्वारा अन्य उद्देश्यों के लिए एकत्रित धन का उल्लेख किया है। क्या हमारा इस विधेयक में उससे कोई संबंध है?

श्री कॉमथः निस्संदेह, यह कांग्रेस द्वारा पास किया गया संकल्प है जो कि इस विधेयक का जनक है।

श्री अध्यक्षः इसमें कोई व्यवस्था का प्रश्न नहीं है। माननीय सदस्य अपनी बहस जारी रखें।

ऽविधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर)ः मेरे आदरणीय मित्र डॉ. बक्श टेक चंद, प्रधानमंत्री तथा पंडित ठाकुर दास भार्गव के भाषणों के बाद मैं नहीं समझता कि कोई ऐसा बिंदु रह गया है जिसके बारे में मुझे कुछ कहने की आवश्यकता है। इससे चर्चा के दौरान.... ...विभिन्न वक्ताओं द्वारा उठाए गए प्रश्नों का हल मिल गया है। विशेषकर इस ट्रस्ट के कुछ हितों के प्रतिनिधित्व के संबंध में। मैं समझता हूँ कि इनका प्रभावी ढंग से उत्तर दिया गया है तथा मेरे पास इसमें कुछ और जोड़ने के लिए नहीं है।

माननीय अध्यक्षः प्रश्न हैः

फ्कि जलियांवाला बाग में 13 अप्रैल, 1919 को मारे गए या घायल हुए लोगों की याद को अमर बनाने के लिए एक राष्ट्रीय स्मारक का निर्माण तथा प्रबंधन करने का उपबंध करने के लिए विधेयक पर विचार किया जाए।य्

प्रस्ताव अंगीकार किया गया।

श्री जे.आर. कपूर (उत्तर प्रदेश)ः (हिन्दी में दिए गए भाषण का अंग्रेजी अनुवाद)ः मैं प्रस्ताव रखने की अनुमति चाहता हूँः

खंड 2 में, फ्नेशनल मैमोरियलय् के स्थान पर फ्राष्ट्रीय स्मारकय् रखा जाए।

मेरा निवेदन यह है कि यह उपयुक्त है कि इस राष्ट्रीय स्मारक का नाम राष्ट्रीय भाषा में होना चाहिए। जिस राष्ट्रीय स्मारक को हम बनाने जा रहे हैं उसको उपयुक्त नाम देना चाहिए तथा यह नाम ऐसा होना चाहिए कि देश में सभी को आसानी से समझ में आ जाए। इसका नाम अंग्रेजी में रखकर हम असंख्य लोगों को इसकी उपयोगिता समझने से वंचित कर देंगे। इसलिए, मैं निवेदन करता हूँ कि इसका नाम जलियांवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक रखा जाना चाहिए। मुझे आशा और विश्वास है कि माननीय मंत्री मेरे इस विनम्र निवेदन से सहमत होंगे और इस संशोधन को स्वीकार करेंगे। इस संबंध में मुझे कुछ और नहीं जोड़ना है।

ऽसं. वा., खंड 10, भाग II, 20 अप्रैल, 1951, पृष्ठ 7229-33