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होकर सिर्फ सामान्य प्रकृति का होगा ताकि जो भी कुछ ट्रस्ट करना चाहे उसे करने के संबंध में ट्रस्ट किसी भी समय अपने आपको असहाय महसूस न करे। मैं निश्चित तौर पर कह सकता हूँ कि इस विधेयक के प्रभारी माननीय मंत्री को यह आसानी से स्वीकार्य होगा। ऐसा खंड प्रायः निश्चित तौर पर अन्य समान अधिनियम में पाया जाता है।
माननीय अध्यक्षः इस संशोधन की भाषा स्वतः स्पष्ट है तथा मैं नहीं समझता कि इसपर और आगे वक्तव्य की आवश्यकता है।
सरदार वी.एन. मानः मैं प्रस्ताव रखने की अनुमति चाहता हूँः
खंड 3 के भाग (क) के बाद एक नया भाग जोड़ें तथा तदनुसार अन्य भागों को पुनः लेखबद्ध करेंः
फ्(ख) सर्वसाधारण के लाभार्थ या उस स्थल पर 13 अप्रैल, 1919 को मारे गए या घायल हुए लोगों के लिए या उनके आश्रितों के लिए या अन्य उन लोगों के लिए जिन्होंने राष्ट्रीय लक्ष्य हेतु सेवा की है या मारे गए या स्थायी रूप से विक्लांग हुए लोगों के लिए शैक्षिक, सामाजिक या ऐसे ही अन्य लोक संस्थान शुरू करना, या निधियां जुटाना या छात्रवृत्तियां शुरू करना।य्
जैसा कि इस विधेयक में दिया गया है ट्रस्ट के उद्देश्य केवल अमृतसर शहर में जलियांवाला बाग पर और उसके आसपास फ्उपयुक्त इमारतें खड़ी करना तथा उनका रख-रखाव करना, पार्क या संरचनाएं करना..........आदि। मैं सोचता हूँ कि इस संशोधन को स्वीकार करके इस स्मारक का दायरा बढ़ेगा तथा स्मारक को उन लोगों की याद में जो चले गए और अधिक यादगार बनाएगा।
माननीय अध्यक्षः क्या मैं जान सकता हूँ कि क्या कोई संशोधन माननीय मंत्री को स्वीकार्य है?
डॉ. अम्बेडकरः मैं नहीं समझता कि मैं कोई भी संशोधन स्वीकार कर सकता हूं। मैं उन संशोधनों को स्वीकार क्यों नहीं कर सकता, इस बारे में शायद कुछ कहना आवश्यक होगा।
श्री कामथ के संशोधन के संबंध में ‘प्रबंधन’ शब्द का जोड़ा जाना आवश्यक है। प्रत्येक ट्रस्ट के पास जुटाए गए तथा प्राप्त किए गए धन का प्रबंधन करने की शक्तियाँ होती ही हैं।
श्री कपूर के संशोधन के संबंध में फ्इस न्यास के उद्देश्यों को बढ़ावा देने के लिए अन्य कार्य करनाय् भी फिर से अनावश्यक है। जब उद्देश्यों का निर्धारण किया जाता है तो उनमें इन उद्देश्यों के प्रोत्साहन के लिए कुछ भी करने की शक्तियाँ निहित होती हैं।