282 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
सरदान मान के संशोधन के संबंध में, मैं समझता हूँ कि यह सहमति हुई है कि इन न्यासियों को अपने आपको एक सामाजिक सेवा लीग में परिवर्तित नहीं करना चाहिए। इनका उद्देश्य सिर्फ इस राष्ट्रीय स्मारक का रख-रखाव करना होना चाहिए।
श्री कॉमथः क्या मैं यह नहीं पूछ सकता कि फ्प्राप्त करनाय् शब्द भी अनावश्यक है? जो कुछ भी धन जुटेगा वह ट्रस्ट द्वारा ही प्राप्त किया जाएगा। इसलिए फ्प्राप्त कियाय् हटाया जा सकता है।
डॉ. अम्बेडकरः ऐसा हो सकता है, पर मेरे विचार में फ्प्रबंधनय् बिल्कुल फालतू है।
माननीय अध्यक्षः मैं यह जानना चाहूँगा कि क्या माननीय सदस्य अपने संशोधनों के लिए दबाव डाल रहे हैं।
सरदार बी.एस. मानः मैं अपने संशोधन पर दबाव नहीं डाल रहा।
श्री जे.आर. कपूरः नहीं।
श्री कॉमथः ठीक है, इसे रखा जा सकता है।
माननीय अध्यक्षः क्या वे इसे रखना चाहते हैं या नहीं रखना चाहते?
श्री कॉमथः इसे रखने की आवश्यकता नहीं है।
माननीय अध्यक्षः प्रश्न हैः
फ्कि खंड 3 इस विधेयक का हिस्सा बन गया है।य्
प्रस्ताव अंगीकार किया गया।
खंड 3 इस विधेयक में जोड़ा गया।
खंड 4 - न्यासी (ट्रस्टी) आदि।
श्री सिधवा (मध्य प्रदेश)ः मेरा एक संशोधन है।
माननीय अध्यक्षः क्या डॉ. अम्बेडकर कोई संशोधन रखने जा रहे हैं?
डॉ. अम्बेडकरः श्री सिधवा रख रहे हैं।
श्री सिधवाः मैं प्रस्ताव रखना चाहूंगाः
खंड 4 के उप-खंड (1) के भाग (ख) में सरदार वल्लभ भाई पटेल के नाम के स्थान पर डॉ. सैफुद्दीन किचलू का नाम रखा जाए।
यह स्वतः स्पष्ट है और मैं इस प बात नहीं करना चाहता।