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मुझे बदल देना चाहिए, यह है कि विधेयक में किसी भी ऐसी देशी रियासत के विरुद्ध किसी प्राधिकार को हड़पने का गुप्त प्रयास नहीं किया गया है जिसने इस संबंध में अपना प्राधिकार डोमिनियन सरकार को समर्पित न किया हो। मेरा विचार है कि इससे सभी संदेह और शंकाएं दूर हो जानी चाहिएं जिन्हें इस विधेयक के संबंध में इस सदन में व्यक्त किया गया है। और मैं नहीं समझता कि यदि माननीय सदस्य उस बात को ध्यान में रखे जो कुछ मैंने कहा है, तो मेरे सामने प्रस्तुत अनेक संशोधनों में से किसी की आवश्यकता होगी जो मैं आदेश पत्र में देखता हूँ।
मैं इससे अधिक कुछ नहीं कहना चाहता, क्योंकि जो कुछ मुझे कहना था मैं कह चुका हूँ किंतु मेरे आदरणीय मित्र श्री संथानम् ने विधेयक पर अपने विचार प्रकट करते समय कहा था कि कल मेरे द्वारा अपनाई गई स्थिति में और इस विधयेक से उत्पन्न स्थिति में असंगति है। मेरा ख़्याल है कि मेरे मित्र श्री संधानम् ने मेरे द्वारा कही गई बात को पूर्णतया गलत समझा है। उस समय मैंने कहा था कि इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि नर्सिंग विधेयक, समवर्ती विधायी सूची की प्रविष्टि सं. 16 से संबंधित है।, डोमिनियन सरकार द्वारा कोई अधिकारिता अर्जित किए जाने की संभावना नहीं थी क्योंकि अंगीकार पत्र और देशी रियासतों ने यह पूर्ण रूप से स्पष्ट कर दिया है कि यदि वे भारत संघ में सम्मिलित होंगे तो भी वे केवल सूची सं. 1, जो एक प़ेQडरल सूची है, की बाबत और उसमें से भी कुछ विषयों की बाबत ही सम्मिलित होंगे। अतः मेरी दलील थी कि इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस बात की बिल्कुल भी संभावना नहीं है कि भारतीय डोमिनियन किसी भी प्रकार की अधिकारिता अर्जित करे, और इसीलिए किसी भी प्रकार का विधान जिसे वे खंड I में अपने संशोधन द्वारा शामिल करना चाहते हैं निश्चित रूप से अव्यावहारिक होगा। जहां तक इस विधेयक का संबंध है, भारतीय डोमिनियन द्वारा प्रांतेतर प्रकृति की और अधिकारिता अर्जित किये जाने में अंतर्निहित रूप से कुछ भी असंभव नहीं है, और इसीलिए पूर्वानुमान द्वारा इसे लागू करते हुए बनाया गया कोई विधान अव्यावहारिक नहीं होगा क्योंकि संभावना सदैव बनी रहती है। अंतः मेरा निवेदन है कि मेरे द्वारा ली गई दो स्थितियों में कोई विसंगति नहीं है।
ऽमाननीय अध्यक्षः मेरा ख़्याल है कि माननीय सदस्य अभी संशोधन प्रस्तुत करना चाहते हैं।
श्री हिम्मत सिंह के. महेश्वरीः जी हाँ, मैं उठाए गए प्रश्न का उत्तर पाने के लिए आभारी रहूंग। महोदय, मैं प्रस्ताव पेश करता हूँः
फ्कि विधेयक के खंड 2 के भाग (क) में ‘संधि, अनुदान, प्रथा, अनधिकार ग्रहण या अन्य विधिपूर्ण साधनों’ शब्दों के स्थान पर ‘संधि या करार’ शब्द रखे जाएँ।य्
ऽसं. स. (वि.) वा., खंड II, 9 दिसम्बर, 1947, पृष्ठ 1571-72