16 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय अध्यक्षः संशोधन पेश किया गया हैः
फ्कि विधेयक में खंड 2 के भाग (क) मेंः ‘संधि अनुदान, प्रथा, अनधिकार ग्रहण या अन्य विधिपूर्ण साधनों फ्शब्दों के स्थान पर ‘संधि या करार’ शब्द रखे जाएँ।य्
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः अध्यक्ष महोदय, दोनों संशोधनों को यद्यपि दो भिन्न शीर्षकों के अन्तर्गत प्रस्तुत किया गया है फिर भी वस्तुतः वे एक-ही हैं। संशोधन सं. 19 को संशोधन सं. 9 के निष्कर्ष के रूप में रखा जा सकता है और इस दृष्टि से दोनों में कोई अंतर नहीं है। दोनों ही माननीय सदस्यों का, जिन्होंने इस संशोधन का प्रस्ताव किया है उद्देश्य ‘अनुदान, प्रथा और अनधिकार ग्रहण’ शब्दों का लोप करना है। मेरे विचार से वे यही चाहते हैं और जहां तक यही उनका उद्देश्य है, मुझे इसमें कोई संदेह नहीं कि दोनों संशोधन समान और एक ही हैं।
श्रीमन्, मुझे यह कहते हुए खेद है कि मैं यह संशोधन स्वीकार नहीं कर सकता और मुझे इसका भी खेद है कि संशोधन गलतफ़हमी पर आधारित है। सर्वप्रथम, मैं श्री नजीरुद्दीन अहमद द्वारा प्रस्तुत संशोधन के संबंध में यह कहना चाहता हूँ कि उनके संशोधन की मद ( III ) पूर्ण रूप से असंगत है। जनजातीय क्षेत्र ब्रिटिश इंडिया या भारतीय डोमिनियन के भाग हैं। दूसरे, जहाँ तक जन जातीय क्षेत्रों का संबंध है, भारतीय डोमिनियन के राजक्षेत्रातीत अधिकारिता अर्जित करने का प्रश्न ही नहीं उठता। माननीय सदस्य क्या करना चाहते हैं? यदि मैं सही समझ रहा हूँ तो माननीय सदस्य का तात्पर्य यह है कि भारत की डोमिनियन द्वारा प्रयोग की जा सकने वाली राजक्षेत्रातीत अधिकारिता अंगीकार पत्रों से सम्बद्ध होनी चाहिये। मेरे विचार में, उनके दृष्टिकोण का यही सार और निष्कर्ष है और वे यह स्पष्ट करना चाहते हैं, कि इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा प्रयोग की जा सकने वाली अधिकारिता को अंगीकार पत्र की मंजूरी भी प्राप्त हो।
श्री नज़ीरुद्दीन अहमदः सरकार द्वारा भी इसे माना गया है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमन, क्या इस समय अधिनियम उससे भिन्न करता है जैसाकि मेरे माननीय मित्र इस विधेयक में हमसे करना चाहते हैं? जैसाकि मैं कह चुका हूँ देशी रियासतों द्वारा पारित अंगीकार-पत्र केन्द्रीय सरकार को उन सभी शक्तियों, प्राधिकार और अधिकारिता का प्रयोग करने के लिए समर्थ बनाते हैं जो देशी रियासतों के संबंध में सम्राट के कार्यों का निष्पादन करने के लिए महामहिम सम्राट के प्रतिनिधि द्वारा किसी भी समय प्रयोक्तव्य थीं। देशी रियासतों द्वारा पारित अंगीकार-पत्र केन्द्रीय सरकार को इस बात के लिये सशक्त बनाते हैं कि वह ऐसी तमाम शक्तियों, प्राधिकार और अधिकारिता का प्रयोग करें जो किसी समय महामहिम सम्राट के प्रतिनिधि