33. संविधान (प्रथम संशोधन) विधेयक - Page 305

290 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इसके अन्तर्गत वह प्रत्येक भेदभाव आ जाता है, जो इस अनुच्छेद में वर्णित आधारों के अतिरिक्त किन्हीं अन्य आधारों पर किया जाए और मेरा निवेदन है कि ‘केवल’ शब्द पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया।

अनुच्छेद 16 के खंड (4) के बारे में मुझे यह कहना है कि हम जब भी आरक्षण करेंगे, हमें किन्हीं ऐसे व्यक्तियों को छोड़ना होगा जिनकी कोई जाति है। किसी जाति विशेष से सम्बन्धित किसी व्यक्ति को छोड़े बिना आरक्षण करना वास्तव में असम्भव है। मेरे विचार में, हमें इस बात को ध्यान में रखना होगा, जो एक आधारभूत सिद्धांत भी है, जिसका उल्लेख मेरे ख्याल से मुल्ला के पिछले संस्करण के प्रथम पृष्ठ पर किया गया है कि ऐसा कोई हिन्दू नहीं है, जिसकी कोई जाति न हो। प्रत्येक हिन्दू की कोई न कोई जाति है वह या तो ब्राह्मण है या मराठा है या कुन्बी है या कुम्हार है या बढ़ई है। यह एक मूलभूत बात है कि ऐसा कोई हिन्दू नहीं है, जिसकी कोई जाति न हो। इसलिए यदि आप पिछड़े वर्गों के पक्ष में आरक्षण करेंगे, जो कतिपय जातियों का एक समूह है, तो आप उन लोगों को छोड़ेंगे, जो किन्हीं अन्य जातियों से सम्बन्धित हैं। अतः इस देश की परिस्थितियां ऐसी हैं कि जब कभी भी हम आरक्षण करेंगे, हमें कुछ ऐसे लोगों को छोड़ना ही होगा जो किन्हीं जातियों से सम्बन्धित हैं। इन बातों के सम्बन्ध में मैं व्यक्तिगत रूप से यह महसूस करता हूँ कि यह निर्णय बहुत सन्तोषजनक निर्णय नहीं है। इस सम्बन्ध में मैं यह कहना चाहूँगा कि सदन या इसके सदस्य यहां जो मर्जी कहें, अपनी वकालत के दौरान मैंने न्यायधीश से बड़े जोरदार शब्दों में कहा है कि मैं उसके निर्णय का पालन करने के लिये तो बाध्य हूँ किन्तु मैं उसका आदर करने के लिये बाध्य नहीं हूँ। प्रत्येक वकील न्यायधीश से यह कहने के लिए स्वतंत्र है कि न्यायधीश का निर्णय गलत है। अब मैं इस स्वतंत्रता का परित्याग करने के लिये तैयार नहीं हूँ। मैंने न्यायधीश को हमेशा यह कहा है कि इस मामले में मेरा यही दृष्टिकोण है। हमें इस बात को ध्यान में रखना होगा कि मार्गदर्शी सिद्धांतों के अनुच्छेद 46 में सरकार को यह दायित्व सौंपा गया है कि वह कमजोर वर्गों, जिन्हें मैं पिछड़े वर्ग कहता हूँ, या ऐसे वर्ग कहता हूँ जो स्वयं अपने पैरों पर खड़े नहीं हो सकते, जैसे अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लोग, की भलाई के लिये सभी सम्भव उपाय करे। अतः यह न केवल सरकार का बल्कि इस संसद का भी दायित्व है कि वह यह सुनिश्चित करने का भरसक प्रयास करे कि अनुच्छेद 46 का पालन हो और यदि इस अनुच्छेद का पालन होना है, तो हमें ऐसा संशोधन करना होगा जिससे कि अनुच्छेद 29(2) और अनुच्छेद 16(4) की वैसी व्याख्या न हो जैसी कि की गई है और इस प्रकार कमजोर वर्गों की उन्नति को न रोका जाये। अनुच्छेद 15 का संशोधन करने का प्रस्ताव इसी कारण लाया गया है।

मैं अब अनुच्छेद 19 के उपबंधों को लेता हूँ। इस अनुच्छेद के कारण इस सदन के सदस्यों में जबरदस्त उत्तेजना पैदा हुई थी। मैं पहले इस विधेयक के (3) ( i ) ( a ) को