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लेता हूँ, जिसके द्वारा अनुच्छेद 19 के मूल खंड (2) में संशोधन करने का प्रस्ताव है। सदस्यगण देखें कि इस उप-खंड द्वारा तीन शीर्षों को जोड़ने का प्रस्ताव है, अर्थात्ः
विदेशी राज्यों से सम्बन्ध_
सार्वजनिक व्यवस्था_
अपराध करने के लिये उकसाना।
एक प्रश्न पूछा गया है कि इन तीन नये शीर्षों को लाने की क्या आवश्यकता थी। आवश्यकता उन निर्णयों के कारण उत्पन्न हुई है, जो उच्चतम न्यायालय और प्रान्तीय उच्च न्यायालयों द्वारा दिये गये हैं। इस सम्बन्ध में मैं रमेश थापर और बृजभूषण के मामलों में उच्चतम न्यायालयों द्वारा दिये गये निर्णयों का उल्लेख करना चाहूंगा। ये उच्चतम न्यायालय के दो निर्णय हैं। इसके बाद, मैं राज्यों के उच्च न्यायालयों के निर्णयों पर आता हूँ।
पंजाब उच्च न्यायालय के निम्नलिखित निर्णयों पर विचार किया जाएः
मास्टर तारासिंह का मामला।
अमरनाथ बाली बनाम पंजाब राज्य।
पटना और मद्रास उच्चन्यायालयों के दो निर्णय हैंः
शीलाबाला देवी बनाम बिहार के मुख्य सचिव,
बाइनस बनाम मद्रास राज्य।
रमेश थापर के मामले में मद्रास सार्वजनिक व्यवस्था, 1949 को बनाये रखने की वैधता का प्रश्न अन्तर्ग्रस्त था और बृजभूषण के मामले में पूर्वी पंजाब सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम, 1949 की वैधता अन्तर्ग्रस्त थी। मास्टर तारासिह के मामले में भारतीय दण्ड संहिता की धारा 124 ( A ) और 153 A की वैधता अंतर्ग्रस्त थी। अमरनाथ बाली के मामले में 1931 के भारतीय प्रेस (आपातकालीन शक्तियां) अधिनियम की धारा 4 की वैधता अन्तर्ग्रस्त थी। शीलाबाला देवी के मामले में और बाइनस बनाम मद्रास राज्य के मामले मे भी इसी धारा 4 की वैधता अन्तर्ग्रस्त थी। इन सभी मामलों में यह निर्णय किया गया है कि ये अवैध विधियां हैं, अर्थात् अनुच्छेद 19(2) में दिये गये उपबंधों को ध्यान में रखते हुए न्यायालयों ने कहा है कि ये सभी अधिनियम, संविधान बनने से पूर्व, कितने ही वैध क्यों न समझे जाते हों, पर अब दोषपूर्ण कानून हैं, क्योंकि वे मूल अधिकारों के अनुरूप नहीं हैं।
मैं सदन से चाहता हूँ कि वह इस बात पर विचार करे कि उच्चतम न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों के इन फैसलों का राज्यों में क्या प्रभाव है। सदन के सामने स्थिति बिल्कुल स्पष्ट करने के लिये मैं उन अधिनियमों की कई धाराओं को, पढ़कर