33. संविधान (प्रथम संशोधन) विधेयक - Page 307

292 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

सुना सकता हूँ, जिन्हे अकृत और शून्य घोषित किया गया है। परन्तुत समयाभाव के कारण मैं प्रेस अधिनियम की धारा 4 का ही उल्लेख करूंगा, क्योंकि इसी पर आपत्ति की गई है। प्रैस अधिनियम की धारा 4 में कहा गया हैः

फ्जब कभी प्रांतीय सरकार को प्रतीत हो कि किसी मुद्रणालय का, जिसके सम्बन्ध में धारा 3 के अन्तर्गत प्रतिभूति जमा किये जाने के आदेश जारी किये गये हैं, कोई ऐसा समाचार-पत्र, पुस्तक अथा अन्य दस्तावेज को छापने अथवा प्रकाशित करने के प्रयोजनार्थ प्रयोग किया जाता है, जिसमें ऐसे शब्द, संकेत अथवा प्रत्यक्ष चित्र दिये हों जोय् ........मैं चाहूंगा कि सभा इन खंडों पर विशेष ध्यान देµ

फ्(क) हत्या के किसी अपराध अथवा किसी अन्य ऐसे संज्ञेय अपराध, जिसमें हिंसा अन्तर्वलित हो, किए जाने के लिए उकसाने अथवा प्रोत्साहित करने और उकसाने अथवा प्रोत्साहित करने की प्रवृत्ति रखते हों, अथवा

(ख) ऐसे किसी अपराध अथवा ऐसे किसी वास्तविक अथवा फर्जी व्यक्ति के लिए जिसने ऐसा कोई अपराध किया हो, अथवा जिस पर ऐसा अपराध करने का आरोप हो, अथवा जिसके बारे में कहा गया हो कि उसने ऐसा अपराध किया है, प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से अनुमोदन अथवा प्रशंसा व्यक्त करते हों,

अथवा जो प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से

(ग) किसी अधिकारी, सैनिक आदि को पथभ्रष्ट करने की प्रवृत्ति रखते हों.........।

जिस महत्वपूर्ण बिन्दु पर मैं सरकार का ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूँ वह यह है कि (क) फ्हत्या के किसी अपराध अथवा किसी अन्य ऐसे संज्ञेय अपराध, जिसमें हिंसा अन्तर्वलित हो, किये जाने के लिये उकसाने अथवा प्रोत्साहित करने और उकसाने अथवा प्रोत्साहित करने की प्रवृत्ति रखते हों।य् इसका अभिप्राय यह हुआ कि प्रांतीय उच्च न्यायालयों के उन निर्णयों के अन्तर्गत, जिनका मैंने उल्लेख किया, अब कोई भी व्यक्ति हत्या के किसी अपराध अथवा किसी अन्य ऐसे संज्ञेय अपराध, जिसमें हिंसा अन्तर्निहित हो, के किये जाने के लिए उकसा सकता है अथवा प्रोत्साहित कर सकता है अथवा ऐसी प्रवृत्ति रख सकता है।

मैं सभा से चाहूंगा कि वह इस प्रश्न पर विचार करे कि क्या यह स्थिति संतोषजनक है कि अब कोई भी व्यक्ति हत्या जैसे अपराध अथवा किसी अन्य संज्ञेय अपराध, जिसमें हिंस्सा अन्तर्निहित है, के किये जाने के लिये उकसाने, अथवा प्रोत्साहित करने के लिए स्वतंत्र है? मैं चाहूंगा कि सभा इस पर निष्पक्ष रूप से विचार करे। क्या यह वांछनीय स्थिति है (कई माननीय सदस्यः नहीं, नहीं।) कि हमारा संविधान हमें ऐसी निराशाजनक स्थिति में छोड़ दे कि हमें अनुच्छेद 19 के खंड (1) के वाक्-स्वातंत्र्य का जो अधिकार दिया