298 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
गया है। परन्तु सचाई यह है कि उच्चतम न्यायालय द्वारा अपनाये गये व्याख्या संबंधी नियमों को ध्यान में रखते हुए कि जब तक किसी कानून को खंड (2) में उल्लिखित नहीं किया जाता, तब तक वह संसद की सामर्थ्य में नहीं है और चूंकि फ्विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधय् का खंड (2) में उल्लेख नहीं है, हमें यह समझने के लिए किसी ज्योतिषी के पास जाने की जरूरत नहीं है कि जब वह प्रश्न न्यायालय के समक्ष आयेगा तो उस पर भी व्याख्या का वही तरीका अपनाया जायेगा।
श्री कॉमथः उसके लिए डॉ. अम्बेडकर काफी हैं।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः और इसी कारण हमने फ्विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधय् शीर्ष को नये शीर्षों में सम्मिलित करना आवश्यक समझा है।
मेरे मित्र डॉ. मुखर्जी ने पूछा कि क्या किसी देश में ऐसा कानून है। मैंने दृष्टांत
खोजने की कोशिश की है और मैं डॉ. मुखर्जी को बता सकता हूँ कि ऐसा कोई भी देश नहीं है, जहां ऐसा कानून न हो। इंग्लैण्ड में यह सामान्य विधि का नियम है। इसके लिए किसी सांविधानिक विधि की आवश्यकता नहीं है। सामान्य विधि इंग्लैण्ड में ही नहीं, बल्कि सभी स्वतंत्र उपनिवेशों में लागू है। इसीलिए वहां भी वही नियम है। वास्तव में, कनाडा में सामान्य विधि नियम में संशोधन कर दिया गया है और एक सांविधानिक उपबन्ध द्वारा इसे और अधिक कड़ा बना दिया है।
पं. कुंजरु (उत्तर प्रदेश)ः क्या मेरे माननीय मित्र इंग्लैण्ड की स्थिति पर थोड़ा और प्रकाश डालेंगे?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः हाँ, किन्तु मुझे प्रधानमंत्री के लिए भी कुछ समय छोड़ना चाहिए।
माननीय सदस्यगणः आप अपना पूरा समय लीजिए।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरे विचार में लोगों के मन में कुछ है.......।
डॉ. एस.सी. मुखर्जीः और विधेयक के निर्माताओं के मन भी।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः नहीं, ऐसी बात नहीं है। आप देखेंगे कि हमारे मन में कोई भ्रम नहीं है। मेरे दिमाग में स्थिति एकदम स्पष्ट है।
श्री कॉमथः हम पूरी सरकार की बात कर रहे हैं, आप अकेले की नहीं।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखने से क्या भावार्थ है? अधिकांश सदस्यों की यह धारणा है कि यदि इस मद को शामिल कर लिया गया तो वे सरकार की विदेशी नीति की आलोचना नहीं कर सकेंगे। मैं यह कहना चाहूंगा कि यह धारणा सरासर गलत है।