33. संविधान (प्रथम संशोधन) विधेयक - Page 314

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श्री कॉमथः यह आपकी राय है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इस मद अर्थात् किसी राज्य के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाये रखने को इसीलिये लाया गया है ताकि अपमान और मानहानि संबंधी सिद्धांत को लागू किया जा सके। अर्थात् आप कोई ऐसा काम नहीं करेंगे, ऐसी बात नहीं कहेंगे और ऐसी कोई अफवाह नहीं फैलायेंगे, जिससे किसी विदेशी राष्ट्र की बदनामी हो। इसके अलावा इसमें कोई और बात नहीं है। आंग्ल सामान्य विधि भी इसी भी आधारित है अर्थात् यह मानहानि के कानून का एक अंग है। अर्थात् आप ऐसे किसी विदेशी राज्य की मानहानि नहीं करेंगे, जिसके साथ इस देश के मैत्रीपूर्ण संबंध हो। अब मैं अपने मित्र डॉ. शयामाप्रसाद मुखर्जी से यह जानना चाहता हूँ कि क्या वह समझते हैं कि उनसे या अन्य लोगों से केवल यह कहना कि वे किसी मित्र राष्ट्र की बदनामी नहीं करेंगे, उनके वाक्स्वातंत्र के अधिकार पर इतना गम्भीर अतिक्रमण है कि इस मद को ही अस्वीकार कर दिया जाए।

डॉ. एस.पी. मुखर्जीः आप इसे स्पष्ट रूप से क्यों नहीं कहते?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः समझा जाता है कि ऐसा ही है। मैं जानता हूँ कि मेरे मित्र बहुत पढ़ते हैं। किंतु यदि वह 1932 की इस असेम्बली में हुई चर्चा को पढ़ते जब यह कानून बनाया गया था और उद्देश्यों और कारणों के कथन को पढ़ते जो मैंने पढ़ा और उस विधेयक पर प्रवर समिति के प्रतिवेदन को भी पढ़ते, तो वह पाते कि इस कानून में भी जो मैंने कहा है, उससे अधिक कुछ नहीं है।

श्री कॉमथः क्या पेकिंग सरकार द्वारा प्रयोग किया गया वाक्यांश ‘रनिंग डॉग’ अपमानजनक अथवा मानहानिकारक नहीं है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इसके लिये पेकिंग सरकार को कानून बनाना चाहिए।

श्री कॉमथः उसके जवाब में यदि कोई यहां कुछ कहे तो?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः जैसे के साथ तैसा बर्ताव करने की यह नीति राज्य के लिए अच्छी नहीं है।

श्री कॉमथः पारस्परिक व्यवहार के बारे में क्या कहना है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकः इससे हमारे लिये बहुत परेशानी पैदा हो जायेगी। जब हम अपने मित्र पड़ोसियों के प्रति जिम्मेदार हैं कि हमारे नागरिक उनका अपमान या मानहानि नहीं करेंगे तो उसी तरह चीन की सरकार को भी यह जिम्मेदारी निभानी चाहिये कि चीन के नागरिक भारत की मानहानि नहीं करेंगे। इसका उपाय प्रत्येक सरकार को अपनी कार्यपालक शक्ति का प्रयोग करके करना चाहिये।