300 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
प्रो. रंगा (मद्रास)ः और आदर-भाव के साथ भी।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः हाँ, और आदर-भाव के साथ भी।
नजीरुद्दीन अहमदः किन्तु मानहानि का वर्तमान कानून विदेशी राज्यों का भी बचाव करेगा।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरे मित्र ने मुझे उससे अधिक काम करने के लिए उकसा दिया है जो मैं नहीं करना चाहता था। अब मैं उन्हें अमरीका का कानून पढ़कर सुनाता हूँ जो बहुत महत्वपूर्ण है। मेरे मित्र डॉ. श्यामाप्रसाद मुकर्जी ने बहुत जोर देकर पूछा है कि क्या कोई ऐसा देश है जहां इस प्रकार का कानून है। मैं उन्हें बताना चाहता हूँ कि अमरीका में है। मेरे पास ‘फोरेन रिलेशंस एण्ड इन्टरकोर्स’ नामक यह बड़ा ग्रंथ है।
श्री फ्रैंक एन्थनी (मध्य प्रदेश)ः क्या यह बिल ऑफ राइट्स का अंग है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इसमें कहा गया है कि यह बहुत महत्वपूर्ण बात हैःµ
फ्इस तथ्य के बावजूद कि अमरीका इस विशेष विषय पर विधि बनाने की अनुमति कांग्रेस को नहीं देता, उच्चतम न्यायालय ने, इस आधार पर कि प्रत्येक राज्य को अपनी रक्षा करने की पुलिस शक्ति प्राप्त है, इस आशय का विधान संविधि संग्रह में रखने की अनुमति दे दी है।य्
श्री आर.के. चौधरी (असम)ः किन्तु संविधान में नहीं।
माननीय डॉ. बी.आर अम्बेडकरः मेरे मित्र नजीरुद्दीन, जिन्होंने यह प्रश्न पूछा था कि फ्कानून क्या है?य् इसे पढ़ सकते हैं। यह हमारे भारतीय कानून से भी कहीं आगे है। पहले खण्ड में कहा गया है कि फ्यदि कोई व्यक्ति जान-बूझकर मौखिक रूप से अथवा लिखकर किसी अन्य व्यक्ति के बारे में असत्य कथन करता है तो वह दस वर्ष तक के कारावास के दंड का भागी होगा और उस पर न्यायालय अपने स्वविवेक से पाँच हजार डालर तक का जुर्माना लगा सकता है।य्
मैं उनसे अपेक्षा करता हूँ कि वे हमारे कानून के दंड संबंधी खंड की इस कानून के दण्ड संबंधी खंड से तुलना करें।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैंने जो प्रश्न उठाया था वह इससे अलग है।
माननीय डॉ. बी.आर अम्बेडकरः मैं इसे फिर पढ़ता हूँ।
अध्यक्ष माननीयः शन्ति, शान्ति। मेरे विचार में बहुत ज्यादा टोका-टाकी करने से चर्चा में कोई मदद नहीं मिलेगी।